नोएडा हिंसक श्रमिक प्रदर्शन मामले में विदेशी पैसों की एंट्री पर जांच गहरी, कई खातों की पड़ताल जारी

गौतमबुद्ध नगर में पिछले महीने हुए श्रमिक प्रदर्शनों और हिंसा के मामले में अब विदेशी फंडिंग की जांच प्रमुख मुद्दा बन गई है। पुलिस का दावा है कि मामले में गिरफ्तार कुछ आरोपियों के बैंक खातों में विदेशों से बड़ी रकम भेजी गई थी। जांच एजेंसियां अब इन आर्थिक लेनदेन की पूरी श्रृंखला को खंगाल रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन पैसों का इस्तेमाल किस मकसद से किया गया।

अधिकारियों के अनुसार, अप्रैल में हुए श्रमिक प्रदर्शनों के दौरान नोएडा और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मजदूर एकत्र हुए थे। कई स्थानों पर प्रदर्शन उग्र हो गया था, जिसके कारण यातायात बाधित हुआ और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हुई। कुछ जगहों पर आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आई थीं।

पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान एक आरोपी के बैंक खातों में विदेशों से डॉलर, यूरो और पाउंड जैसी मुद्राओं में रकम आने के संकेत मिले हैं। अधिकारियों का दावा है कि यह राशि अलग-अलग समय पर कई ट्रांजैक्शन के जरिए भेजी गई थी। अब साइबर और आर्थिक अपराध से जुड़ी टीमें यह पता लगाने में लगी हैं कि इन लेनदेन के पीछे कौन लोग या संस्थाएं शामिल थीं।

जांच एजेंसियों ने कुछ डिजिटल उपकरण, बैंक दस्तावेज और मोबाइल रिकॉर्ड भी कब्जे में लिए हैं। सूत्रों के अनुसार, इन दस्तावेजों की मदद से आरोपियों के संपर्कों और वित्तीय गतिविधियों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कई स्तरों पर पड़ताल की जा रही है।

पुलिस का आरोप है कि कुछ संगठनों और व्यक्तियों ने प्रदर्शन को उग्र बनाने में भूमिका निभाई। हालांकि, मजदूर संगठनों से जुड़े कई लोगों ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि मजदूर अपनी समस्याओं और अधिकारों को लेकर आवाज उठा रहे थे और प्रदर्शन को गलत तरीके से हिंसा से जोड़कर पेश किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी आंदोलन या विरोध प्रदर्शन में विदेशी धन के इस्तेमाल के संकेत मिलते हैं, तो जांच एजेंसियां बैंक खातों, डिजिटल ट्रेल और अंतरराष्ट्रीय लेनदेन की गहन जांच करती हैं। ऐसे मामलों में यह भी देखा जाता है कि कहीं धन का उपयोग अवैध गतिविधियों या सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने के लिए तो नहीं किया गया।

राजनीतिक हलकों में भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कुछ नेताओं ने निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि कुछ का कहना है कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। प्रशासन का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना स्वीकार नहीं किया जा सकता।

औद्योगिक विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक असंतोष की स्थिति बनने पर प्रशासन, कंपनियों और मजदूर संगठनों के बीच संवाद जरूरी होता है। समय रहते समस्याओं का समाधान न होने पर तनाव बढ़ सकता है, जिसका असर उद्योग और निवेश दोनों पर पड़ता है।

फिलहाल पुलिस विदेशी फंडिंग के दावों की पुष्टि के लिए वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इन पैसों का वास्तविक उद्देश्य क्या था और प्रदर्शन से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध था या नहीं।

Star CG News 24
Author: Star CG News 24

Rajendra Dhote

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