वैश्विक तेल संकट के बीच भारत में ईंधन कीमतों पर बढ़ा दबाव, सरकार की चुनौती बढ़ी

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ने लगी है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिया है कि यदि मध्य पूर्व में जारी संकट और लंबा चलता है, तो सरकार को ईंधन की बढ़ती लागत का असर आम लोगों तक पहुंचाना पड़ सकता है। उनके बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले महीनों में पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं।

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में गिना जाता है। यहां किसी भी प्रकार की बाधा का असर पूरी दुनिया के तेल बाजार पर पड़ता है।

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। फिलहाल सरकार ने घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की है, लेकिन लगातार बढ़ते आयात खर्च के कारण दबाव बढ़ता जा रहा है।

आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो सरकार के लिए ईंधन पर सब्सिडी और कर संतुलन बनाए रखना कठिन हो सकता है। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ जाती है।

आरबीआई गवर्नर ने अपने बयान में यह भी कहा कि भारत ऊर्जा और उर्वरकों के आयात पर काफी निर्भर है। मध्य पूर्व संकट के कारण केवल तेल ही नहीं, बल्कि अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति और कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। इसका असर कृषि और उद्योग दोनों क्षेत्रों पर दिखाई दे सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में ईंधन की बचत और विदेशी मुद्रा संरक्षण पर जोर दिया है। सरकार ऊर्जा खपत कम करने और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ती हैं तो इसका असर आम लोगों के दैनिक खर्च पर पड़ेगा। परिवहन महंगा होने से खाद्य पदार्थों, सब्जियों, दूध और अन्य जरूरी सामान की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है।

इसी बीच भारतीय रुपये में भी कमजोरी देखने को मिल रही है। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से तेल आयात और महंगा हो जाता है। यह स्थिति सरकार और रिजर्व बैंक दोनों के लिए चुनौती मानी जा रही है।

अर्थशास्त्रियों के अनुसार, फिलहाल सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और वैश्विक हालात के अनुसार आगे की रणनीति तय की जाएगी। यदि मध्य पूर्व में तनाव कम होता है, तो तेल की कीमतों में राहत मिल सकती है। लेकिन संकट बढ़ने की स्थिति में भारत में ईंधन कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है।

Star CG News 24
Author: Star CG News 24

Rajendra Dhote

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