तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद सामने आए विदेशी नागरिकों के कथित मतदान मामले ने राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में हलचल पैदा कर दी है। एयरपोर्ट पर जांच के दौरान कुछ विदेशी पासपोर्ट धारकों के पास भारतीय मतदाता पहचान पत्र मिलने के बाद अब सुरक्षा एजेंसियां और चुनाव से जुड़े विभाग मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार, चेन्नई और मदुरै एयरपोर्ट पर नियमित इमिग्रेशन जांच के दौरान कुछ यात्रियों की उंगलियों पर चुनावी स्याही के निशान दिखाई दिए। इसके बाद अधिकारियों को संदेह हुआ और दस्तावेजों की जांच की गई। जांच में सामने आया कि कई लोग विदेशी पासपोर्ट के साथ भारतीय मतदाता पहचान पत्र भी इस्तेमाल कर रहे थे।
प्रारंभिक जांच में ज्यादातर संदिग्ध श्रीलंका मूल के बताए जा रहे हैं, जबकि कुछ अन्य विदेशी देशों से जुड़े लोगों के नाम भी सामने आए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इन लोगों को भारतीय मतदाता सूची में किस आधार पर शामिल किया गया और दस्तावेजों की सत्यापन प्रक्रिया में कहां चूक हुई।
चुनाव विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला चुनावी प्रणाली के लिए गंभीर चिंता का विषय है। भारत में मतदान का अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को प्राप्त है। ऐसे में विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल होना प्रशासनिक लापरवाही या फर्जी दस्तावेज नेटवर्क की ओर संकेत कर सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां अब संदिग्धों के यात्रा रिकॉर्ड, निवास संबंधी दस्तावेज, आधार और मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया से जुड़े कागजात की जांच कर रही हैं। अधिकारियों को शक है कि कुछ लोगों ने लंबे समय तक भारत में रहने का फायदा उठाकर स्थानीय पहचान दस्तावेज हासिल किए हो सकते हैं।
इस मामले ने चुनाव से पहले हुए मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। चुनाव आयोग ने हाल ही में बड़ी संख्या में पुराने और डुप्लीकेट नाम हटाने तथा नए मतदाताओं को जोड़ने की प्रक्रिया पूरी की थी। इसके बावजूद विदेशी नागरिकों के नाम सूची में पाए जाने से पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर बहस शुरू हो गई है।
राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। कुछ नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सत्यापन प्रणाली को और मजबूत करने की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल डेटा और दस्तावेज सत्यापन प्रणाली को आधुनिक तकनीक से जोड़ना समय की मांग है।
कानून विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई विदेशी नागरिक भारतीय चुनाव में मतदान करता पाया जाता है, तो यह चुनावी और आपराधिक कानूनों के तहत गंभीर अपराध माना जा सकता है। फर्जी दस्तावेज बनाने या उपयोग करने के मामलों में भी अलग कानूनी कार्रवाई संभव है।
सुरक्षा एजेंसियां अब इस पहलू की भी जांच कर रही हैं कि कहीं इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क तो काम नहीं कर रहा था। अधिकारियों का कहना है कि यदि बड़े स्तर पर फर्जी पहचान दस्तावेज तैयार किए गए हैं, तो इससे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवाल भी खड़े हो सकते हैं।
फिलहाल गिरफ्तार लोगों से पूछताछ जारी है और संबंधित एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ जांच को आगे बढ़ा रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां या नए खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।








