भारत और Sri Lanka के बीच समुद्री सीमा को लेकर विवाद एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है। हाल ही में Sri Lankan Navy ने 10 भारतीय मछुआरों को कथित तौर पर अवैध रूप से अपने जलक्षेत्र में मछली पकड़ने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया और उनकी ट्रॉलर नाव को भी जब्त कर लिया। इस घटना ने दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मछुआरा विवाद को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।
नौसेना के अनुसार, यह कार्रवाई मन्नार के उत्तर में समुद्री इलाके में की गई, जहां नियमित गश्त के दौरान भारतीय नाव को देखा गया। श्रीलंकाई अधिकारियों का कहना है कि मछुआरे अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा का उल्लंघन कर रहे थे। इसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है।
इस वर्ष की बात करें तो यह कोई पहली घटना नहीं है। अब तक Sri Lankan Navy द्वारा 100 से अधिक भारतीय मछुआरों को गिरफ्तार किया जा चुका है और कई ट्रॉलरों को जब्त किया गया है। हालांकि, दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत के बाद समय-समय पर कुछ मछुआरों को रिहा भी किया जाता रहा है। हाल ही में करीब 30 भारतीय मछुआरों की रिहाई ने उम्मीद जगाई थी, लेकिन नई गिरफ्तारी ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है।
भारत और श्रीलंका के बीच मछुआरों का यह विवाद मुख्य रूप से Palk Strait क्षेत्र में केंद्रित है। यह संकरा समुद्री इलाका Tamil Nadu के तट और श्रीलंका के बीच स्थित है और समुद्री जीवों से भरपूर होने के कारण मछुआरों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसी वजह से दोनों देशों के मछुआरे अक्सर यहां मछली पकड़ने के लिए आते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी सीमांकन की अस्पष्टता और समुद्री संसाधनों पर बढ़ता दबाव इस विवाद की मुख्य वजह हैं। कई बार मछुआरे अनजाने में सीमा पार कर जाते हैं, जबकि कुछ मामलों में जानबूझकर भी ऐसा किया जाता है। श्रीलंकाई नौसेना इस तरह के मामलों में सख्त रुख अपनाती है, जिससे विवाद और बढ़ जाता है।
इस पूरे मुद्दे का मानवीय पहलू भी बेहद गंभीर है। गिरफ्तार मछुआरे आमतौर पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से होते हैं, जिनकी आजीविका पूरी तरह समुद्र पर निर्भर करती है। गिरफ्तारी के बाद उनके परिवारों को आर्थिक तंगी और असुरक्षा का सामना करना पड़ता है।
भारत सरकार लगातार इस मुद्दे को श्रीलंका के सामने उठाती रही है और मछुआरों के साथ मानवीय व्यवहार तथा उनकी शीघ्र रिहाई की मांग करती है। साथ ही, दोनों देशों के बीच इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए कई दौर की बातचीत भी हो चुकी है।








