बिहार की सियासत में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे Nitish Kumar ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे राज्य में चल रही सरकार का कार्यकाल समाप्त हो गया। उनके इस फैसले के साथ ही बिहार में एक नए राजनीतिक दौर की शुरुआत हो गई है, जहां अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व में सरकार बनने जा रही है।
नीतीश कुमार ने अपना इस्तीफा राज्यपाल Syed Ata Hasnain को सौंपा। इससे पहले उन्होंने मंत्रिमंडल की अंतिम बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें प्रशासनिक कार्यों की समीक्षा की गई। इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई।
करीब दो दशकों तक बिहार की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाले नीतीश कुमार ने कुल दस बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। उनके कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की गईं, जिनमें लड़कियों के लिए साइकिल योजना, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार, और राज्य में शराबबंदी जैसे फैसले शामिल हैं। इन पहलों ने उन्हें खासकर ग्रामीण और महिला मतदाताओं के बीच लोकप्रिय बनाया।
हाल ही में नीतीश कुमार राज्यसभा के सदस्य बने हैं, जिससे यह संकेत मिला कि वे सक्रिय राज्य राजनीति से धीरे-धीरे दूरी बना रहे हैं। उनके इस्तीफे को इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब वे राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में अपनी भूमिका निभा सकते हैं।
इधर, बिहार विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी भाजपा ने सरकार गठन की तैयारियां तेज कर दी हैं। 243 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 89 विधायक हैं, जो उसे सरकार बनाने की स्थिति में रखते हैं। पार्टी ने अपने विधायक दल की बैठक बुलाकर नए नेता के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान उपमुख्यमंत्री Samrat Chaudhary मुख्यमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। वे पिछड़े वर्ग के एक प्रमुख नेता हैं और पार्टी संगठन में भी उनकी मजबूत पकड़ है।
राजभवन में 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे नए मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। इस समारोह के साथ ही बिहार में नई सरकार आधिकारिक रूप से कार्यभार संभाल लेगी। यह पहली बार होगा जब भाजपा अपने नेतृत्व में बिहार में सरकार बनाएगी, जो राज्य की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का इस्तीफा केवल एक पद परिवर्तन नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक युग का अंत है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा के नेतृत्व में बनने वाली नई सरकार विकास, रोजगार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर किस तरह काम करती है।







