एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले समेत पार्टी के सभी 8 सांसदों ने 10 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। बैठक के बाद परिसीमन विधेयक पर पार्टी के रुख और महाराष्ट्र की राजनीति को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
मुलाकात की वजह
रिपोर्टों के अनुसार, बैठक का प्रमुख संदर्भ आगामी परिसीमन विधेयक है। सरकार को संवैधानिक संशोधन से जुड़े ऐसे विधेयक के लिए संसद में व्यापक, संभवतः दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होगी; इसलिए विपक्षी दलों के कुछ सांसदों से संवाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुले पहले संकेत दे चुकी हैं कि यदि लोकसभा सीटों में प्रस्तावित बढ़ोतरी को स्पष्ट रूप से लिखित रूप में रखा जाता है, तो पार्टी विधेयक पर विचार कर सकती है। उनका रुख सीधे समर्थन के बजाय शर्तों पर आधारित बताया जा रहा है।
सियासी अटकलें
बैठक को लेकर तीन प्रमुख कयास लगाए जा रहे हैं:
क्या एनसीपी (शरद पवार गुट) परिसीमन विधेयक पर सरकार का समर्थन करेगी?
क्या शरद पवार गुट और अजित पवार गुट के बीच फिर से नजदीकी या विलय की कोई संभावना बन रही है?
क्या यह मुलाकात महाराष्ट्र में भाजपा-एनसीपी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है?
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक सुप्रिया सुले ने एनडीए में शामिल होने या एनसीपी के विलय की अटकलों को पहले खारिज किया है। पार्टी की ओर से इन मुलाकातों को राजनीतिक पुनर्संरेखण के बजाय मुद्दा-आधारित या प्रशासनिक संवाद बताया गया है।
संभावित राजनीतिक असर
यदि एनसीपी (एसपी) परिसीमन विधेयक पर समर्थन देती है, तो इससे केंद्र सरकार को संसद में संख्यात्मक लाभ मिल सकता है, लेकिन इसे तत्काल एनडीए में शामिल होने के संकेत के रूप में देखना जल्दबाजी होगी। शरद पवार गुट के लिए यह किसानों, सिंचाई और महाराष्ट्र से जुड़े मुद्दों पर प्रधानमंत्री के समक्ष दबाव बनाने का अवसर भी हो सकता है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मुलाकात हुई है, लेकिन समर्थन, गठबंधन या विलय पर कोई आधिकारिक अंतिम घोषणा नहीं हुई है। इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को राजनीतिक बातचीत और रणनीतिक संकेत के रूप में देखना अधिक उचित होगा।








