मुजफ्फरपुर में “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर एक साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है, जिसने एक व्यक्ति से लगभग 17 लाख रुपये की ठगी की थी। पीड़ित को फर्जी तरीके से CBI और पुलिस अधिकारी बताकर व्हाट्सएप कॉल से डराया‑धमकाया गया और उससे बैंक खाते से रकम ट्रांसफर करवा ली गई।
आरोपी व्हाट्सएप कॉल पर खुद को CBI व पुलिस अधिकारी बताकर पीड़ित को “डिजिटल अरेस्ट” में लेने की धमकी देते थे।
पीड़ित को डराकर बताया गया कि अगर उसकी रकम ट्रांसफर नहीं हुई तो उसे असली गिरफ्तारी व जेल का सामना करना पड़ेगा, जिसके बाद वह बैंक से लगातार रकम भेज देता रहा।
पुलिस की कार्रवाई
साइबर थाना, मुजफ्फरपुर ने कांड संख्या 58/26 दर्ज कर विशेष टीम गठित की, जिसने कॉल डिटेल्स और बैंक खातों की तकनीकी जांच के आधार पर तीन आरोपियों की पहचान की।
इस गिरोह के खिलाफ मुजफ्फरपुर साइबर थाना पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके पास से मोबाइल, चेकबुक व अन्य साजो‑सामान भी बरामद हुए।
इस मामले से सबक
यह “डिजिटल अरेस्ट” वाली धमकी अब पूरे देश में चलन बन चुकी है; ऐसे कॉल या व्हाट्सएप मैसेज पाकर तुरंत रकम भेजने से बचना चाहिए।
अगर कोई भी सरकारी एजेंसी ऑनलाइन या फोन के जरिए आपसे रकम, ओटीपी या लॉगिन डिटेल मांगे, तो बिना असली ऑफिस से संपर्क किए या नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत किए पुल‑वर्ड नहीं देना चाहिए।








