उत्तराखंड के चमोली जिले में हिमालय की गोद में बसे पवित्र सिख तीर्थ हेमकुंड साहिब की वार्षिक यात्रा 2026 इस बार 23 मई से आरंभ होने जा रही है। समुद्र तल से करीब 4,329 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह गुरुद्वारा दुनिया के सबसे ऊंचे धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। हर वर्ष देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर आस्था की डुबकी लगाते हैं और आध्यात्मिक शांति की अनुभूति करते हैं।
यात्रा का शुभारंभ 23 मई को दोपहर 12 बजे उद्घाटन अरदास के साथ होगा। मुख्य ग्रंथी द्वारा की जाने वाली यह अरदास यात्रा की आधिकारिक शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है। इसके अगले दिन यानी 24 मई से आम श्रद्धालुओं के लिए कपाट खोल दिए जाएंगे और नियमित दर्शन प्रारंभ हो जाएंगे।
यात्रा से पहले गोविंदघाट गुरुद्वारा में पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा। यहां अखंड पाठ का भोग, शबद कीर्तन और विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। ‘पंज प्यारे’ की अगुवाई में पहला जत्था गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब के लिए रवाना होगा। इसी दौरान गुरुद्वारे में हुकमनामा भी पढ़ा जाएगा, जो श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक संदेश का स्रोत होता है।
हेमकुंड साहिब की यात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ एक चुनौतीपूर्ण ट्रेक भी मानी जाती है। श्रद्धालुओं को गोविंदघाट से लगभग 19 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई तय करनी होती है। रास्ते में घांघरिया प्रमुख पड़ाव है, जहां यात्री आराम करते हैं और आगे की यात्रा के लिए तैयारी करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में मार्ग पर सुविधाओं में सुधार किया गया है, जिससे यात्रा अपेक्षाकृत सुगम हुई है।
प्रशासन और गुरुद्वारा प्रबंधन समिति ने यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। रास्तों की मरम्मत, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, सुरक्षा व्यवस्था और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ऊंचाई अधिक होने के कारण ऑक्सीजन की कमी और मौसम में अचानक बदलाव जैसी चुनौतियों को देखते हुए श्रद्धालुओं को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
हेमकुंड साहिब का प्राकृतिक सौंदर्य भी इसे खास बनाता है। बर्फ से ढकी पर्वत श्रृंखलाएं, शांत झील और स्वच्छ वातावरण श्रद्धालुओं को अद्भुत मानसिक शांति प्रदान करते हैं। यही वजह है कि यह स्थान धार्मिक तीर्थ के साथ-साथ पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बन चुका है।








