देश में गर्मी का मौसम इस बार ज्यादा चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। India Meteorological Department (IMD) ने संकेत दिए हैं कि अप्रैल से जून के बीच देश के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक हीटवेव (लू) के दिन दर्ज किए जा सकते हैं। इस चेतावनी ने आम लोगों के साथ-साथ प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है।
मौसम विभाग के महानिदेशक Mrutyunjay Mohapatra के अनुसार, उत्तर भारत के इंडो-गंगेटिक मैदानों, पूर्वी तटीय राज्यों और पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में इस बार तापमान ज्यादा रहने की संभावना है। खासतौर पर Gujarat, Maharashtra, Uttar Pradesh और Haryana जैसे राज्यों में गर्मी का असर अधिक देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ क्षेत्र ऐसे होते हैं जहां हर साल इस समय तापमान सामान्य रूप से ही काफी ऊंचा रहता है। उदाहरण के तौर पर महाराष्ट्र का विदर्भ क्षेत्र, जहां तापमान 41 से 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। वहीं उत्तर भारत के कई इलाकों में मई और जून के दौरान पारा 40 से 44 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। ऐसे में लोगों को तेज गर्मी और लू का सामना करना पड़ सकता है।
IMD ने यह भी स्पष्ट किया है कि हर क्षेत्र में आधिकारिक तौर पर हीटवेव घोषित नहीं होगी, लेकिन तापमान सामान्य से ज्यादा रहने के कारण लोगों को लू जैसी परिस्थितियों का अनुभव हो सकता है। इसलिए समय रहते सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
गर्मी के बढ़ते खतरे को देखते हुए मौसम विभाग ने जागरूकता बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। विभाग द्वारा व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए मौसम की जानकारी खासकर उन लोगों तक पहुंचाई जा रही है जो खुले में काम करते हैं, जैसे मजदूर, किसान और रेहड़ी-पटरी वाले। इसके अलावा सार्वजनिक स्थानों पर डिस्प्ले बोर्ड लगाए गए हैं, जहां तापमान और उससे बचाव के उपायों की जानकारी दी जा रही है।
सरकार भी इस स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सक्रिय हो गई है। National Disaster Management Authority के माध्यम से कॉमन अलर्ट प्रोटोकॉल का उपयोग कर लोगों के मोबाइल फोन पर मौसम संबंधी चेतावनियां भेजी जा रही हैं। इसका उद्देश्य यह है कि हर व्यक्ति तक समय पर जानकारी पहुंचे और वह अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सके।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि वे दोपहर के समय बाहर निकलने से बचें, अधिक से अधिक पानी पिएं और हल्के कपड़े पहनें। इसके अलावा सिर को ढककर रखना और धूप से बचाव के उपाय अपनाना जरूरी है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।








