असम चुनाव 2026 के बीच ULFA का इतिहास फिर चर्चा में, कैसे एक संगठन बना बड़ी चुनौती

गुवाहाटी — असम विधानसभा चुनाव 2026 के नजदीक आते ही राज्य के इतिहास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे फिर से चर्चा में आ गए हैं। इनमें सबसे प्रमुख है United Liberation Front of Asom (उल्फा) का उदय, जिसने एक समय पर असम की सुरक्षा और राजनीतिक स्थिति को गहराई से प्रभावित किया था।

उल्फा की स्थापना 7 अप्रैल 1979 को असम के ऐतिहासिक स्थल Rang Ghar में हुई थी। उस दौर में राज्य के कुछ युवाओं को यह महसूस हो रहा था कि असम के प्राकृतिक संसाधनों का पूरा लाभ स्थानीय लोगों को नहीं मिल रहा है और केंद्र सरकार राज्य के साथ न्याय नहीं कर रही। इसी असंतोष ने एक ऐसे संगठन को जन्म दिया, जिसने आगे चलकर सशस्त्र संघर्ष का रास्ता अपनाया।

इस संगठन के संस्थापकों में Arabinda Rajkhowa, Paresh Baruah और Anup Chetia जैसे नाम प्रमुख हैं। शुरुआत में यह एक विचारधारा आधारित समूह था, लेकिन धीरे-धीरे इसने उग्रवादी रूप ले लिया और राज्य में अपनी पकड़ मजबूत कर ली।

1980 के दशक में उल्फा ने अपनी गतिविधियों का विस्तार किया। संगठन ने खुद को असमिया अस्मिता का रक्षक बताया और केंद्र के खिलाफ आवाज उठाई। इस दौरान कई युवा इससे जुड़े, खासकर वे जो पहले छात्र संगठनों से सक्रिय थे, जैसे All Assam Students’ Union और Assam Jatiyatabadi Yuva Chatra Parishad। इन संगठनों ने अवैध प्रवासन के खिलाफ बड़े पैमाने पर आंदोलन चलाया था, जिससे राज्य में असंतोष का माहौल बना।

Assam Agitation के दौरान उल्फा ने चुनाव बहिष्कार जैसे कदमों का समर्थन किया और बाद में सशस्त्र संघर्ष को जरूरी बताया। इस दौर में राज्य में हिंसा की घटनाएं बढ़ीं और उल्फा पर हत्या, अपहरण और वसूली जैसे गंभीर आरोप लगे। सुरक्षा बलों के साथ लगातार टकराव ने हालात को और जटिल बना दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि उल्फा का उदय केवल एक उग्रवादी संगठन का विस्तार नहीं था, बल्कि यह उस समय के सामाजिक और आर्थिक हालात का परिणाम था। बेरोजगारी, संसाधनों के बंटवारे को लेकर असंतोष और सांस्कृतिक पहचान की चिंता ने इस संगठन को मजबूती दी।

हालांकि समय के साथ सरकार ने कई सैन्य और कूटनीतिक कदम उठाए, जिससे उल्फा की ताकत में कमी आई। कुछ गुटों ने शांति वार्ता का रास्ता भी अपनाया, लेकिन संगठन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। आज भी इसका नाम असम की राजनीतिक चर्चाओं में सामने आता है।

असम चुनाव 2026 के दौरान उल्फा का इतिहास फिर चर्चा में आना इस बात का संकेत है कि राज्य की राजनीति में अतीत की घटनाओं का प्रभाव अभी भी बना हुआ है। राजनीतिक दल भी इस मुद्दे को अलग-अलग नजरिए से उठा रहे हैं।

Star CG News 24
Author: Star CG News 24

Rajendra Dhote

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