अशोक खरात का “हवाला प्रकरण” महाराष्ट्र‑केंद्रित बड़े वित्तीय घोटाले से जुड़ा हुआ केस है, जिसमें आरोप हैं कि यह “भोंदू बाबा” बनकर धर्म और तंत्र‑मंत्र के नाम पर लोगों से पैसा ऐंठता आया और उसे हवाला और जमीन खरीद के ज़रिए धोया।
अशोक खरात कौन हैं?
अशोक खरात नासिक (महाराष्ट्र) के रहने वाले एक स्वयंभू “गुरु” या “भोंदू बाबा” हैं, जिन्हें धार्मिक / तंत्रिक अनुष्ठानों के नाम पर महिलाओं के साथ यौन शोषण, धोखाधड़ी और बड़े स्तर पर जमीन‑घोटाले के मामलों में बड़ा नेटवर्क चलाने के आरोप मिले हैं।
“हवाला / धन‑लेनदेन” मामला क्या है?
जांच टीमों को शक है कि अशोक खरात ने अपने शिष्यों और “साधकों” के नाम पर दर्जनों बैंक और सहकारी संस्था के खाते खुलवाकर बड़े पैमाने पर ऑनलाइन और कैश ट्रांज़ैक्शन किए, जिनसे लगभग 70 करोड़ रुपये की संपत्ति बनी।
कई खातों से उनके मोबाइल नंबर जुड़े मिले, जिससे जांचकर्ताओं को यह संदेह है कि यह एक तरह का हवाला‑जैसा सिस्टम था, जिसमें चंदा / “दान” रूप में आए पैसे को अलग‑अलग नामों से फिर जमीन, खेत, फार्म‑हाउस आदि में निवेश कर धोया गया।
नासिक / जमीन घोटाले से जुड़ा पक्ष
शिर्डी, नासिक और कोपरगांव आदि इलाकों में अशोक खरात पर जमीन धोखाधड़ी के कई अलग‑अलग केस दर्ज हैं, जिनमें आरोप है कि व्यवसायी और किसानों से लाखों‑करोड़ों रुपये का चूना लगाया गया।
एक नया मामला नाशिक के सरकारवाडा पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ है, जिसमें एक कांदा व्यापारी के साथ करीब 1 करोड़ रुपये से अधिक की फसवणूक का आरोप है, जिससे खरात पर कुल गऩवाओं की संख्या 12 तक पहुँच गई है।
सियासी‑सामाजिक चर्चा में क्यों है?
केस ने “भोंदू बाबा, हवाला, जमीन घोटाला और यौन शोषण” के ट्रिनिटी वाले रूप में उभरकर राज्य और केंद्रीय स्तर पर बड़ी हलचल मचाई है, और विपक्ष इसका इस्तेमाल राज्य सरकार की “धर्म‑आधारित घोटालों” की निगरानी पर सवाल खड़ा करने के लिए कर रहा है।
अगर चाहें तो आपके लिए इस मामले के विभिन्न धारा‑संबंधी आरोप (youth, महाराष्ट्र Human Sacrifice Act, धोखाधड़ी, हवाला आदि) की एक छोटी सारणी भी बना सकता हूँ।








