खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता को लेकर अपना रुख और सख्त कर दिया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से बातचीत में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।
“फ्रीडम ऑफ नेविगेशन” यानी समुद्री मार्गों की आज़ादी, वैश्विक व्यापार की रीढ़ मानी जाती है। दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में अगर इन मार्गों पर खतरा बढ़ता है तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
पीएम मोदी ने बातचीत के दौरान कहा कि किसी भी देश को अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों को बाधित नहीं करना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत इस मुद्दे पर अपने रुख से पीछे नहीं हटेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान केवल एक कूटनीतिक संदेश नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संकेत भी है। भारत यह दिखाना चाहता है कि वह वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
इस बीच, कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने भी चेतावनी दी है कि अगर खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
भारत सरकार ने इस स्थिति को देखते हुए अपने आयात और भंडारण की रणनीति को मजबूत करना शुरू कर दिया है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इस मुद्दे को उठाया जा रहा है।
अंत में, यह साफ है कि भारत इस संकट को केवल एक क्षेत्रीय समस्या के रूप में नहीं देख रहा, बल्कि इसे वैश्विक आर्थिक स्थिरता से जोड़कर देख रहा है। पीएम मोदी की पहल इसी व्यापक सोच का हिस्सा है।








