ईंधन संकट से कराहता मोरबी, सिरेमिक कारोबार पर पड़ा वैश्विक तनाव का साया

गुजरात का मोरबी, जिसे देश की सिरेमिक राजधानी कहा जाता है, इन दिनों गहरे संकट में फंसा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव, खासकर ईरान से जुड़े हालात, ने गैस आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसका सीधा असर मोरबी के सिरेमिक उद्योग पर पड़ा है, जहां बड़ी संख्या में फैक्ट्रियां या तो बंद हो चुकी हैं या न्यूनतम क्षमता पर काम कर रही हैं।

मोरबी का सिरेमिक सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है। यहां बनने वाले टाइल्स और सैनिटरी उत्पाद न केवल भारत में बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में निर्यात किए जाते हैं। लेकिन मौजूदा संकट के चलते उत्पादन में भारी गिरावट आई है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि ऑर्डर होने के बावजूद सप्लाई नहीं हो पा रही, जिससे निर्यात कारोबार पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

इस स्थिति की सबसे बड़ी वजह प्राकृतिक गैस और प्रोपेन की कमी है। सिरेमिक उत्पादन के लिए ये दोनों ईंधन बेहद जरूरी होते हैं, क्योंकि इनके बिना भट्टियों में आवश्यक तापमान बनाए रखना संभव नहीं है। गैस की आपूर्ति बाधित होने के कारण उत्पादन पूरी तरह प्रभावित हुआ है। इसके अलावा, जो गैस उपलब्ध है, उसकी कीमतों में भारी बढ़ोतरी ने उद्योग पर अतिरिक्त दबाव बना दिया है।

मोरबी में हजारों छोटे और मध्यम उद्योग इस क्षेत्र पर निर्भर हैं। उत्पादन रुकने के कारण इन इकाइयों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई यूनिट्स के मालिकों का कहना है कि अगर स्थिति लंबे समय तक ऐसी ही बनी रही, तो उन्हें स्थायी रूप से अपने कारखाने बंद करने पड़ सकते हैं।

इस संकट का असर रोजगार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। लाखों मजदूरों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। कई श्रमिकों को अस्थायी रूप से काम से हटा दिया गया है, जबकि कुछ को वेतन में कटौती का सामना करना पड़ रहा है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है, क्योंकि मजदूरों की आय घटने से बाजारों में मांग कम हो गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट केवल स्थानीय नहीं, बल्कि वैश्विक परिस्थितियों का परिणाम है। मध्य पूर्व में जारी तनाव के चलते ऊर्जा आपूर्ति के प्रमुख मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे भारत जैसे देशों को गैस की कमी का सामना करना पड़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिरता ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

सरकार और उद्योग संगठन इस समस्या के समाधान के लिए प्रयासरत हैं। वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर काम किया जा रहा है और गैस आपूर्ति को सुचारू बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इस संकट से पूरी तरह उबरने के लिए समय लग सकता है।

Star CG News 24
Author: Star CG News 24

Rajendra Dhote

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