दुनियाभर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सतर्क और सक्रिय नजर आ रहा है। खासतौर पर रसोई गैस यानी एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार नए विकल्पों की तलाश में जुटी है। इसी क्रम में रूस से एलपीजी आयात बढ़ाने की संभावना पर गंभीर मंथन चल रहा है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में कहा कि सरकार की प्राथमिकता देश के नागरिकों तक पर्याप्त और किफायती ईंधन पहुंचाना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय हालात चाहे जैसे भी हों, भारत अपने ऊर्जा हितों से समझौता नहीं करेगा और जरूरत पड़ने पर नए आपूर्ति स्रोतों को तेजी से अपनाएगा।
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और अस्थिरता ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम मार्गों पर दबाव बढ़ने से तेल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ रहा है। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, ऐसे हालात में वैकल्पिक स्रोतों की ओर देख रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस भारत के लिए एक महत्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार बन सकता है। पिछले कुछ समय में भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाया है, जिससे दोनों देशों के बीच ऊर्जा संबंध और मजबूत हुए हैं। इसी आधार पर अब एलपीजी क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने की संभावना जताई जा रही है। इससे भारत को आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, रूस से एलपीजी आयात को लेकर कुछ चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, भुगतान व्यवस्था और लॉजिस्टिक्स से जुड़े मुद्दों को ध्यान में रखते हुए सावधानीपूर्वक निर्णय लेना होगा। इसके अलावा, लंबी दूरी के कारण परिवहन लागत भी एक अहम फैक्टर है, जो कीमतों को प्रभावित कर सकता है।
सरकार इन चुनौतियों से निपटने के लिए बहुस्तरीय रणनीति पर काम कर रही है। एक ओर जहां नए आपूर्ति स्रोतों की तलाश जारी है, वहीं दूसरी ओर घरेलू स्तर पर गैस भंडारण क्षमता बढ़ाने और वितरण नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। पाइप्ड गैस (PNG) के विस्तार और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने जैसे कदम भी इसी दिशा में उठाए जा रहे हैं।
आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि सरकार ने साफ किया है कि एलपीजी की उपलब्धता में कोई बड़ी कमी नहीं आने दी जाएगी। उज्ज्वला योजना और अन्य सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विशेष निगरानी रखी जा रही है।








