वॉशिंगटन: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को परमाणु समझौते पर फैसला लेने के लिए 15 दिन की समयसीमा देकर वैश्विक कूटनीति को नई दिशा दे दी है। ट्रंप ने संकेत दिया कि यदि निर्धारित समय में ठोस प्रगति नहीं होती, तो अमेरिका सख्त कदम उठा सकता है।
इस बयान के बाद मध्य पूर्व क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने क्षेत्र में अतिरिक्त सैन्य संसाधनों की तैनाती की पुष्टि की है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है, ताकि वह परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए सहमत हो।
ईरान की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया में कहा गया है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन किसी भी तरह के दबाव या धमकी के तहत समझौता नहीं करेगा। तेहरान का कहना है कि उसकी परमाणु गतिविधियाँ शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूरोपीय देशों ने संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वार्ता विफल रहती है, तो क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक तेल बाजार पर असर पड़ सकता है।
फिलहाल सबकी निगाहें आने वाले दो हफ्तों पर टिकी हैं, जो तय करेंगे कि बातचीत आगे बढ़ेगी या तनाव और गहराएगा।








