नई दिल्ली:
संभावित अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों को लेकर किसानों के बीच चल रही चर्चाओं के बीच अमूल के शीर्ष नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि भारत किसी भी व्यापार वार्ता में किसानों के हितों से समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि व्यापार नीति बनाते समय घरेलू कृषि और डेयरी क्षेत्र की मजबूती को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।
अमूल की ओर से कहा गया कि व्यापार वार्ताएं केवल आयात को बढ़ावा देने के लिए नहीं होतीं, बल्कि इनका उद्देश्य संतुलित विकास और परस्पर लाभ सुनिश्चित करना होता है। किसी भी समझौते में यह देखा जाता है कि उसका असर किसानों की आय, उत्पादन लागत और बाजार स्थिरता पर क्या पड़ेगा।
अमूल प्रमुख ने बताया कि भारत का डेयरी सेक्टर सहकारी मॉडल पर आधारित है, जहां किसान ही असली हिस्सेदार होते हैं। इस व्यवस्था ने दशकों से किसानों को मजबूत किया है और यही कारण है कि नीतिगत फैसलों में उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि देश में डेयरी उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं। ऐसे में व्यापार समझौतों को लेकर अनावश्यक डर फैलाने की जरूरत नहीं है।
अंत में अमूल ने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार, सहकारी संस्थाएं और किसान संगठन मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते का लाभ देश के किसानों तक पहुंचे और उनके हित पूरी तरह सुरक्षित रहें।
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