मुंबई पुलिस के वेतन घोटाले का मुख्य आरोपी गिरफ्तार
मुंबई पुलिस विभाग में सामने आए 6.41 करोड़ रुपये के कथित वेतन घोटाले में क्राइम ब्रांच ने मुख्य आरोपी अजय राठौड़ को गिरफ्तार किया है। राठौड़ को दहिसर इलाके से पकड़ा गया। वह घोटाले के दौरान उत्तरी क्षेत्रीय विभाग में मुख्य लिपिक के पद पर कार्यरत था।
जांच के अनुसार, वर्ष 2019-20 के दौरान मुंबई पुलिस के वेतन रिकॉर्ड में 10 कथित फर्जी कर्मचारियों के नाम शामिल कर उनके नाम पर सरकारी राशि जारी की गई। इस प्रक्रिया में फर्जी सर्विस आईडी और डीसीपीएस आईडी बनाए जाने का आरोप है।
पुराने वेतन पोर्टल से नए सॉफ्टवेयर में कर्मचारियों का डेटा स्थानांतरित करते समय यह कथित अनियमितता सामने आई। इसके बाद समता नगर पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया और क्राइम ब्रांच की यूनिट-12 ने जांच शुरू की।
इस मामले में अजय राठौड़ के अलावा तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी रामकिशन गोस्वामी, नागेश तलवडेकर, विजया चव्हाण और वरिष्ठ लिपिक अमोल मेश्राम के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस ने मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात और साजिश से संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की है।
मुंबई पुलिस के उत्तरी क्षेत्रीय विभाग में हुए इस कथित घोटाले की आगे की जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी कर्मचारियों के नाम पर जारी रकम किसके खातों में पहुंची और इस पूरे मामले में कितने लोग शामिल हैं।
मुंबई पुलिस के वेतन घोटाले का मुख्य आरोपी गिरफ्तार
मुंबई पुलिस विभाग में सामने आए 6.41 करोड़ रुपये के कथित वेतन घोटाले में क्राइम ब्रांच ने मुख्य आरोपी अजय राठौड़ को गिरफ्तार किया है। राठौड़ को दहिसर इलाके से पकड़ा गया। वह घोटाले के दौरान उत्तरी क्षेत्रीय विभाग में मुख्य लिपिक के पद पर कार्यरत था।
जांच के अनुसार, वर्ष 2019-20 के दौरान मुंबई पुलिस के वेतन रिकॉर्ड में 10 कथित फर्जी कर्मचारियों के नाम शामिल कर उनके नाम पर सरकारी राशि जारी की गई। इस प्रक्रिया में फर्जी सर्विस आईडी और डीसीपीएस आईडी बनाए जाने का आरोप है।
पुराने वेतन पोर्टल से नए सॉफ्टवेयर में कर्मचारियों का डेटा स्थानांतरित करते समय यह कथित अनियमितता सामने आई। इसके बाद समता नगर पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया और क्राइम ब्रांच की यूनिट-12 ने जांच शुरू की।
इस मामले में अजय राठौड़ के अलावा तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी रामकिशन गोस्वामी, नागेश तलवडेकर, विजया चव्हाण और वरिष्ठ लिपिक अमोल मेश्राम के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस ने मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात और साजिश से संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की है।
मुंबई पुलिस के उत्तरी क्षेत्रीय विभाग में हुए इस कथित घोटाले की आगे की जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी कर्मचारियों के नाम पर जारी रकम किसके खातों में पहुंची और इस पूरे मामले में कितने लोग शामिल हैं।
ऐसे हुआ वेतन घोटाले का खुलासा
मुंबई पुलिस का 6.41 करोड़ रुपये का कथित वेतन घोटाला करीब छह साल बाद सामने आया। इसका खुलासा उस समय हुआ, जब पुलिस कर्मचारियों का डेटा पुराने ‘सेवार्थ’ वेतन पोर्टल से नए सॉफ्टवेयर सिस्टम में स्थानांतरित किया जा रहा था। डेटा माइग्रेशन के दौरान वेतन रिकॉर्ड की जांच में कई संदिग्ध प्रविष्टियां सामने आईं।
आंतरिक जांच में पता चला कि मुंबई पुलिस के उत्तरी क्षेत्रीय विभाग के रिकॉर्ड में 10 ऐसे लोगों को कर्मचारी दिखाया गया था, जिनका पुलिस विभाग से कोई संबंध नहीं था। इनके नाम पर फर्जी सर्विस आईडी, उपस्थिति रिकॉर्ड और वेतन बिल तैयार कर कथित तौर पर वेतन जारी किया गया।
घोटाला कब हुआ?
प्रारंभिक जांच के अनुसार, कथित फर्जी भुगतान मुख्य रूप से दिसंबर 2019 से फरवरी 2020 और फिर जून से सितंबर 2020 के बीच किए गए। इस अवधि में सरकारी राशि को फर्जी कर्मचारियों के नाम पर वेतन के रूप में वितरित किया गया।
यह मामला अगस्त 2026 के शुरुआती दिनों में सार्वजनिक रूप से सामने आया, जब आंतरिक ऑडिट और वेतन रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद पुलिस विभाग में अनियमितताएं पकड़ी गईं। इसके बाद समता नगर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कर जांच शुरू की गई और मामला क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया।
संक्षेप में: घोटाला वर्ष 2019-20 में हुआ, लेकिन इसका खुलासा पुराने वेतन सिस्टम से नए सॉफ्टवेयर में डेटा ट्रांसफर के दौरान, करीब छह साल बाद अगस्त 2026 में हुआ। इस वेतन घोटाले में कुल 5 अधिकारियों और खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
एफआईआर में शामिल नाम:
रामकिशन गोस्वामी — पूर्व प्रशासनिक अधिकारी
नागेश तलवडेकर — प्रशासनिक अधिकारी
विजया चव्हाण — क्लर्क
अजय राठौड़ — हेड क्लर्क
अमोल मेश्राम — वरिष्ठ क्लर्क
इन पर सरकारी धन की धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात और साजिश सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले में 10 फर्जी कर्मचारियों के नाम पर वेतन जारी किए जाने का आरोप है, लेकिन एफआईआर विभाग के इन 5 अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज हुई है।
मुंबई पुलिस का 6.41 करोड़ रुपये का कथित वेतन घोटाला करीब छह साल बाद सामने आया। इसका खुलासा उस समय हुआ, जब पुलिस कर्मचारियों का डेटा पुराने ‘सेवार्थ’ वेतन पोर्टल से नए सॉफ्टवेयर सिस्टम में स्थानांतरित किया जा रहा था। डेटा माइग्रेशन के दौरान वेतन रिकॉर्ड की जांच में कई संदिग्ध प्रविष्टियां सामने आईं।
आंतरिक जांच में पता चला कि मुंबई पुलिस के उत्तरी क्षेत्रीय विभाग के रिकॉर्ड में 10 ऐसे लोगों को कर्मचारी दिखाया गया था, जिनका पुलिस विभाग से कोई संबंध नहीं था। इनके नाम पर फर्जी सर्विस आईडी, उपस्थिति रिकॉर्ड और वेतन बिल तैयार कर कथित तौर पर वेतन जारी किया गया।
घोटाला कब हुआ?
प्रारंभिक जांच के अनुसार, कथित फर्जी भुगतान मुख्य रूप से दिसंबर 2019 से फरवरी 2020 और फिर जून से सितंबर 2020 के बीच किए गए। इस अवधि में सरकारी राशि को फर्जी कर्मचारियों के नाम पर वेतन के रूप में वितरित किया गया।
मामला कब सामने आया?
यह मामला अगस्त 2026 के शुरुआती दिनों में सार्वजनिक रूप से सामने आया, जब आंतरिक ऑडिट और वेतन रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद पुलिस विभाग में अनियमितताएं पकड़ी गईं। इसके बाद समता नगर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कर जांच शुरू की गई और मामला क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया।
संक्षेप में: घोटाला वर्ष 2019-20 में हुआ, लेकिन इसका खुलासा पुराने वेतन सिस्टम से नए सॉफ्टवेयर में डेटा ट्रांसफर के दौरान, करीब छह साल बाद अगस्त 2026 में हुआ।
इस वेतन घोटाले में कुल 5 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
इन पर सरकारी धन की धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात और साजिश सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले में 10 फर्जी कर्मचारियों के नाम पर वेतन जारी किए जाने का आरोप है, लेकिन एफआईआर विभाग के इन 5 अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज हुई है।








