देशभर में लंबे इंतजार के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। मौसम की ताज़ा गतिविधियां बताती हैं कि उत्तर भारत की ओर बढ़ रहे घने बादल अब कई राज्यों में व्यापक बारिश की शुरुआत कर सकते हैं। बीते कुछ सप्ताह तक कमजोर पड़े मानसून के कारण जहां भीषण गर्मी और उमस ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया था, वहीं अब मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में नियमित बारिश का दौर शुरू हो सकता है।
हाल के दिनों में मौसम प्रणाली में आए बदलाव के चलते बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से बड़ी मात्रा में नमी उत्तर भारत की ओर पहुंच रही है। इन दोनों दिशाओं से आने वाली नम हवाओं के मिलने से बारिश के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हैं। इसके प्रभाव से उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में बादलों की सक्रियता लगातार बढ़ रही है।
मौसम विभाग का कहना है कि मानसून की गति अब पहले की तुलना में काफी तेज हो गई है। जून के अधिकांश दिनों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई थी, जिससे कई राज्यों में तापमान लगातार ऊंचा बना रहा। कई शहरों में लू और उमस के कारण लोगों को दिन के साथ-साथ रात में भी राहत नहीं मिल रही थी। अब बारिश शुरू होने के बाद तापमान में गिरावट आने की संभावना है, जिससे मौसम सुहावना हो सकता है।
मानसून की धीमी शुरुआत का सबसे अधिक असर कृषि क्षेत्र पर पड़ा। कई राज्यों में किसान पर्याप्त बारिश का इंतजार करते रहे, जिसके कारण धान, मक्का, बाजरा, सोयाबीन और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई निर्धारित समय पर नहीं हो सकी। अब यदि जुलाई के पहले पखवाड़े में अच्छी बारिश होती है तो खेती की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर होने वाली वर्षा फसलों की शुरुआती वृद्धि के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है।
बारिश केवल खेती के लिए ही नहीं, बल्कि जल संकट से जूझ रहे कई इलाकों के लिए भी राहत लेकर आ सकती है। लगातार वर्षा होने से बांधों, तालाबों और जलाशयों का जलस्तर बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा भूजल स्तर में भी सुधार होगा, जिससे आने वाले महीनों में पेयजल और सिंचाई की स्थिति बेहतर हो सकती है।
हालांकि मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह भी दी है। कई स्थानों पर तेज बारिश के साथ आंधी, बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। शहरी क्षेत्रों में कम समय में अधिक बारिश होने से जलभराव, ट्रैफिक जाम और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। ऐसे में स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से मौसम संबंधी चेतावनियों पर ध्यान देने की अपील की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वर्तमान मौसम प्रणाली अगले कुछ दिनों तक सक्रिय रहती है तो उत्तर भारत में मानसून पूरी तरह स्थापित हो जाएगा। इससे न केवल तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आएगी, बल्कि वायु गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिल सकता है। धूल और प्रदूषण के स्तर में कमी आने से लोगों को स्वच्छ वातावरण का अनुभव होगा।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार जुलाई का पहला सप्ताह देश के कई हिस्सों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है। यदि अनुमान के अनुसार बारिश होती है, तो यह कृषि, जल संसाधनों और सामान्य जनजीवन—तीनों के लिए सकारात्मक साबित हो सकती है। लंबे सूखे और भीषण गर्मी के बाद मानसून की यह सक्रियता देश के अधिकांश हिस्सों में राहत और नई उम्मीद लेकर आई है।








