“15 साल संघर्ष किया, तब जाकर पहचान मिली”, पवन कल्याण ने राजनीति के सफर पर कही दिल की बात

पवन कल्याण का एक बयान इन दिनों दक्षिण भारत की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। अभिनेता से नेता बने पवन कल्याण ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की तेज राजनीतिक सफलता देखकर उन्हें कभी-कभी ईर्ष्या महसूस होती है। हालांकि उन्होंने यह बात हल्के अंदाज में कही, लेकिन इसके पीछे उनका लंबा राजनीतिक संघर्ष साफ दिखाई दिया।

पवन कल्याण ने अपने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि राजनीति में टिके रहना फिल्मों जितना आसान नहीं है। उन्होंने बताया कि बीते 15 वर्षों में उन्होंने लगातार जनता के बीच रहकर काम किया, गांव-गांव घूमे और पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए मेहनत की। उन्होंने कहा कि एक राजनीतिक दल बनाना और उसे जमीन पर खड़ा करना बेहद कठिन काम है।

उन्होंने कहा, “किसी परिवार के चार लोगों को एक राय पर लाना मुश्किल होता है, तो लाखों लोगों को साथ लेकर चलना कितना चुनौतीपूर्ण होता होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।” पवन कल्याण ने यह भी स्वीकार किया कि राजनीति में आने का उनका फैसला जोखिम भरा था, लेकिन उन्होंने समाज में बदलाव की उम्मीद से यह रास्ता चुना।

जना सेना पार्टी की स्थापना पवन कल्याण ने 2014 में की थी। शुरुआत में उनकी पार्टी को ज्यादा सफलता नहीं मिली। 2019 के विधानसभा चुनाव में पार्टी सिर्फ एक सीट जीत पाई थी और पवन कल्याण खुद भी चुनाव हार गए थे। उस समय कई राजनीतिक विश्लेषकों ने माना था कि उनकी पार्टी का भविष्य मुश्किल में है।

लेकिन पवन कल्याण ने हार नहीं मानी। उन्होंने धीरे-धीरे संगठन को मजबूत किया और जनता के बीच अपनी पकड़ बनाई। बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और तेलुगु देशम पार्टी के साथ गठबंधन किया। 2024 के आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी 21 सीटों पर जीत दर्ज की, जिन पर उसने चुनाव लड़ा था। इस जीत के बाद पवन कल्याण राज्य की राजनीति में एक बड़े शक्ति केंद्र के रूप में उभरे।

वहीं दूसरी तरफ विजय ने राजनीति में बेहद तेजी से सफलता हासिल की। उन्होंने 2024 में अपनी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम की शुरुआत की और 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल कर मुख्यमंत्री बन गए। उनकी इस सफलता ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया।

पवन कल्याण ने कहा कि तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश की राजनीति अलग-अलग है। उनका मानना है कि तमिलनाडु में स्टार नेताओं को तेजी से जनसमर्थन मिल जाता है, जबकि आंध्र प्रदेश में राजनीतिक समीकरण अधिक जटिल हैं और यहां गठबंधन की राजनीति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि पवन कल्याण का बयान उनकी सादगी और ईमानदारी को दर्शाता है। आमतौर पर नेता अपने संघर्ष को इतने खुले तरीके से स्वीकार नहीं करते, लेकिन पवन कल्याण ने अपनी राजनीतिक यात्रा के कठिन दौर को बिना किसी झिझक के साझा किया।

दक्षिण भारत में फिल्मों से राजनीति में आने वाले नेताओं की परंपरा काफी पुरानी रही है। पहले भी कई अभिनेता राजनीति में सफल हुए हैं, लेकिन विजय और पवन कल्याण की यात्राएं अलग-अलग परिस्थितियों में आगे बढ़ीं। एक ओर विजय ने कम समय में सत्ता हासिल की, वहीं पवन कल्याण ने लंबे संघर्ष के बाद अपनी पहचान मजबूत की।

Star CG News 24
Author: Star CG News 24

Rajendra Dhote

Leave a Comment

मुंबई : महाराष्ट्र में लंबे समय से बारिश न होने के कारण 18–19 जिलों में “सूखे जैसी स्थिति” घोषित की गई है और राज्य सरकार ने किसानों, पशुओं और पेयजल आपूर्ति के लिए तत्काल राहत व तैयारी के कई निर्णय लिए हैं।

मुंबई : सालियान केस में बड़ा कानूनी मोड़, आदित्य ठाकरे को ₹500 करोड़ का मानहानि नोटिस, दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे और पूर्व महाराष्ट्र गृह मंत्री अनिल देशमुख को ₹500 करोड़ के मानहानि दावे वाला कानूनी नोटिस भेजा है।

मुंबई : नया मोड़ (सीबीआई जांच): बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद, सीबीआई (CBI) ने इस मामले में सितंबर 2026 में नए सिरे से एफआईआर (FIR) दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।                                 बॉम्बे हाईकोर्ट ने CBI को दिशा सालियान मामले में नए सिरे से व्यापक जांच के निर्देश दिए। अदालत के प्रमुख निर्देश ये थे:

मुंबई : 13 सितंबर 2026: मराठा आरक्षण के मुद्दे पर मनोज जरांगे पाटील द्वारा 19 सितंबर को मुंबई के आजाद मैदान में प्रस्तावित आंदोलन और अनिश्चित कालीन उपवास को मुंबई पुलिस ने अनुमति देने से इनकार कर दिया है। 

शहर चुनें