Assam में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 26 जीवित गेको बरामद किए हैं। इन दुर्लभ जीवों को बांस की नलियों में छिपाकर अवैध रूप से ले जाया जा रहा था। घटना ने एक बार फिर पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क की गंभीरता को उजागर कर दिया है।
यह कार्रवाई Guwahati के बेटकुची इलाके में की गई, जहां पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ लोग दुर्लभ वन्यजीवों की तस्करी करने वाले हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने इलाके में निगरानी शुरू की और संदिग्ध व्यक्तियों को रोककर तलाशी ली।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार तलाशी के दौरान 26 बांस की पतली नलियां बरामद हुईं, जिन्हें स्थानीय भाषा में “सुंगा” कहा जाता है। इन नलियों को कपड़े और जाल से इस तरह ढका गया था कि अंदर मौजूद जीव आसानी से दिखाई न दें। जब अधिकारियों ने उन्हें खोला तो प्रत्येक नली के भीतर एक जीवित गेको पाया गया।
मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनकी पहचान मोहम्मद इकरामुल हुसैन और मोहम्मद जमीरुद्दीन के रूप में हुई है। प्रारंभिक जांच में दोनों के वन्यजीव तस्करी नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन जीवों को कहां ले जाया जा रहा था और इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि गेको की कुछ प्रजातियों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग होती है। कई देशों में इन्हें विदेशी पालतू जीव के रूप में रखा जाता है, जबकि कुछ जगहों पर अंधविश्वास और पारंपरिक चिकित्सा के नाम पर भी इनकी अवैध खरीद-बिक्री होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार वन्यजीव तस्करी केवल कानून का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह जैव विविधता के लिए भी बड़ा खतरा है। गेको जैसे छोटे जीव पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे कीटों की संख्या नियंत्रित करने में मदद करते हैं और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का अहम हिस्सा माने जाते हैं।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बरामद गेको को सुरक्षित संरक्षण में रखा गया है। चिकित्सकीय जांच और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा। अधिकारियों ने यह भी कहा कि जीवों को तस्करी के दौरान बेहद खराब परिस्थितियों में रखा गया था, जिससे उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता था।
पूर्वोत्तर भारत लंबे समय से वन्यजीव तस्करी के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। यहां दुर्लभ जीव-जंतुओं और पक्षियों की बड़ी संख्या पाई जाती है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय तस्कर गिरोह इस क्षेत्र को निशाना बनाते हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि सीमा क्षेत्रों के जरिए कई बार वन्यजीवों की तस्करी दूसरे देशों तक पहुंचाई जाती है।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इस घटना के बाद वन्यजीव संरक्षण कानूनों को और सख्ती से लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल पुलिस कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है ताकि अवैध वन्यजीव व्यापार को रोका जा सके।








