पश्चिम बंगाल में पहली बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के साथ ही राज्य की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत हो गई है। Suvendu Adhikari ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर भाजपा के लंबे राजनीतिक संघर्ष को नई पहचान दी। कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित इस भव्य समारोह ने केवल सरकार गठन का संदेश नहीं दिया, बल्कि भाजपा की भविष्य की राजनीतिक रणनीति भी साफ कर दी।
समारोह में प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah की मौजूदगी ने कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्तर की अहमियत दे दी। प्रधानमंत्री मोदी ने मंच से जनता का अभिवादन करते हुए जिस तरह झुककर लोगों को प्रणाम किया, उसे भाजपा कार्यकर्ता “जनादेश का सम्मान” बता रहे हैं। यह दृश्य कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और समर्थकों ने इसे बंगाल की जनता के प्रति प्रधानमंत्री का आभार बताया।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा ने इस समारोह के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि बंगाल अब राष्ट्रीय राजनीति में उसकी सबसे बड़ी ताकतों में से एक बन चुका है। पिछले कई वर्षों से भाजपा लगातार राज्य में संगठन मजबूत करने में लगी थी और इस चुनाव में पार्टी को उसका बड़ा फायदा मिला। 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतकर भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया और राज्य में लंबे समय से सत्ता पर काबिज All India Trinamool Congress को सत्ता से बाहर कर दिया।
शपथ ग्रहण समारोह में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और आम लोग मौजूद रहे। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और पूरे क्षेत्र को विशेष रूप से सजाया गया था। राज्यपाल RN Ravi ने मुख्यमंत्री और मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
नई सरकार के गठन में भाजपा ने सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर खास ध्यान दिया है। मंत्रिमंडल में अलग-अलग समुदायों के नेताओं को शामिल कर पार्टी ने यह संकेत दिया है कि वह सभी वर्गों को साथ लेकर चलना चाहती है। Dilip Ghosh, Agnimitra Paul और अन्य नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि नई सरकार राज्य में उद्योग, रोजगार, आधारभूत ढांचे और कानून व्यवस्था पर विशेष ध्यान देगी। चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी ने भ्रष्टाचार और राजनीतिक हिंसा जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था। अब जनता की निगाहें इस बात पर हैं कि भाजपा अपने चुनावी वादों को कितनी तेजी से पूरा कर पाती है।
दूसरी तरफ विपक्षी दलों ने भाजपा सरकार पर नजर बनाए रखने की बात कही है। विपक्ष का कहना है कि लोकतंत्र में जनता के फैसले का सम्मान जरूरी है, लेकिन सरकार को अपने वादों पर भी खरा उतरना होगा।








