अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने और एक संभावित शांति समझौते (डील) के करीब पहुंचने की खबरों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में यह भारी गिरावट देखी गई है । इस भू-राजनीतिक सुधार की उम्मीद ने बाजार में आपूर्ति बाधित होने के डर को कम कर दिया, जिससे कच्चे तेल के दाम करीब 11 फीसदी तक लुढ़क गए ।
कच्चे तेल में गिरावट के प्रमुख कारण
शांति वार्ता की सुगबुगाहट: रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान तनाव समाप्त करने और परमाणु बातचीत का ढांचा तैयार करने के लिए एक शुरुआती समझौते के करीब पहुंच रहे हैं ।
आपूर्ति संबंधी चिंताओं में कमी: संघर्ष के चलते वैश्विक आपूर्ति बाधित होने का जो डर बाजार में बना हुआ था, वह इस वार्ता की खबरों के बाद काफी हद तक कम हो गया है ।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना: बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समझौता सफल होता है, तो ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को सुचारू रूप से खोला जा सकेगा, जिससे तेल की निर्बाध आपूर्ति संभव होगी ।
बाजार पर असर
कच्चे तेल की कीमतों में इस अचानक आई नरमी का सकारात्मक असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखा है । तेल की कीमतों में गिरावट से वैश्विक आर्थिक स्थिरता की उम्मीद बढ़ी है, जिसके चलते निफ्टी और सेंसेक्स में तेजी दर्ज की गई और भारतीय रुपये में भी मजबूती देखी गई है ।








