राजस्थान में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता को झटका देने वाला एक और बड़ा मामला सामने आया है। राज्य की बहुचर्चित राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में संगठित तरीके से फर्जीवाड़ा कर करोड़ों रुपये की हेराफेरी किए जाने का खुलासा हुआ है। इस पूरे मामले ने न केवल स्वास्थ्य विभाग बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) की जांच में सामने आया है कि कुछ डॉक्टरों और निजी लैब संचालकों के बीच एक सुनियोजित नेटवर्क काम कर रहा था। इस नेटवर्क के जरिए मरीजों के नाम पर फर्जी जांच, रिपोर्ट और बिल तैयार किए जाते थे। इसके बाद इन दस्तावेजों को ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड कर सरकारी भुगतान हासिल किया जाता था।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस घोटाले का तरीका बेहद चालाकी भरा था। आरोपी डॉक्टर बिना मरीजों की जांच किए ही महंगे टेस्ट, खासकर एमआरआई और अन्य डायग्नोस्टिक जांचें लिख देते थे। कई मामलों में तो मरीज अस्पताल पहुंचे ही नहीं, फिर भी उनके नाम पर पूरी मेडिकल प्रक्रिया दिखाकर क्लेम लिया गया। इससे यह साफ हो गया है कि सिस्टम में मौजूद खामियों का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की गई।
सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि साधारण जांच को भी महंगे टेस्ट के रूप में दर्शाया गया। उदाहरण के तौर पर, सामान्य एमआरआई को “कॉन्ट्रास्ट एमआरआई” बताकर अधिक राशि का बिल तैयार किया गया। इतना ही नहीं, एक ही टेस्ट की कई रिपोर्ट बनाकर बार-बार भुगतान लेने की कोशिश भी की गई।
जांच में यह भी सामने आया कि कई प्रिस्क्रिप्शन ऐसे दिनों में जारी किए गए जब संबंधित डॉक्टर अपनी ड्यूटी पर मौजूद ही नहीं थे। इससे साफ है कि दस्तावेजों में हेरफेर कर पूरे सिस्टम को गुमराह किया गया। कुछ मामलों में रिपोर्ट की तारीखों में बदलाव कर यह दिखाया गया कि जांच किसी और दिन हुई, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग थी।
एक अन्य चौंकाने वाले खुलासे में यह भी पाया गया कि निजी डॉक्टरों के रेफरल को सरकारी डॉक्टरों के नाम से बदल दिया जाता था, ताकि RGHS के नियमों के तहत भुगतान मिल सके। इस तरह सरकारी योजना के नियमों का दुरुपयोग करते हुए बड़े स्तर पर आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।
पुलिस ने इस मामले में दो प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक सरकारी अस्पताल से जुड़ा डॉक्टर और एक निजी लैब संचालक शामिल है। हालांकि, जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क काफी बड़ा हो सकता है और इसमें अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। इसी वजह से अब इस मामले की गहराई से जांच की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग ने भी इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि RGHS जैसी योजनाएं आम जनता और सरकारी कर्मचारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इस तरह के घोटाले इन योजनाओं की साख को नुकसान पहुंचाते हैं।








