Ghaziabad में जासूसी से जुड़े एक संवेदनशील मामले में पुलिस ने 9 नाबालिगों को हिरासत में लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, ये सभी एक विदेशी हैंडलर के संपर्क में थे, जो उन्हें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए निर्देश दे रहा था। इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच तेज कर दी है।
पुलिस के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क डिजिटल माध्यम पर आधारित था। नाबालिगों को शुरुआत में सामान्य बातचीत के जरिए जोड़ा गया और फिर धीरे-धीरे उन्हें ऐसे कार्य सौंपे गए, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हो सकते थे। कई बार उन्हें यह भी नहीं पता होता था कि वे जो जानकारी साझा कर रहे हैं, उसका दुरुपयोग हो सकता है।
अधिकारियों ने बताया कि बच्चों को फंसाने के लिए मनोवैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल किया गया। उन्हें दोस्ती, गेमिंग या इनाम के बहाने अपने करीब लाया गया और फिर उनसे काम करवाया गया। यह तरीका बेहद खतरनाक माना जा रहा है क्योंकि इसमें नाबालिग आसानी से शिकार बन सकते हैं।
जांच एजेंसियां अब डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर उस विदेशी हैंडलर तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। इसके लिए साइबर विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या यह कोई संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क है।
इस घटना के बाद पुलिस और प्रशासन ने जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया है। स्कूलों और अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे बच्चों को इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग के बारे में जानकारी दें और उनकी गतिविधियों पर नजर रखें।
विशेषज्ञों का कहना है कि आज के डिजिटल युग में इस तरह के खतरे तेजी से बढ़ रहे हैं। इसलिए जरूरी है कि बच्चों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाए और उन्हें सिखाया जाए कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ निजी या संवेदनशील जानकारी साझा न करें।








