भारतीय वायुसेना को नई ताकत देने के लिए केंद्र सरकार एक बेहद अहम रक्षा सौदे की ओर बढ़ रही है। भारत फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर ऐतिहासिक समझौते की तैयारी में है, जिसकी कुल लागत लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये आंकी जा रही है। यह सौदा देश की रक्षा क्षमता को आने वाले दशकों तक मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, यह डील भारतीय वायुसेना की घटती फाइटर स्क्वाड्रन संख्या को ध्यान में रखते हुए की जा रही है। मौजूदा समय में वायुसेना के पास कई पुराने लड़ाकू विमान सेवा के अंतिम चरण में हैं, जिनकी जगह अत्याधुनिक राफेल जेट्स लेंगे।
राफेल फाइटर जेट अपनी बहु-भूमिका क्षमता के लिए जाने जाते हैं। ये एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड मिशनों के साथ-साथ समुद्री अभियानों में भी प्रभावी भूमिका निभाने में सक्षम हैं। उन्नत रडार सिस्टम, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तकनीक और लंबी दूरी की मिसाइलें इन्हें और भी घातक बनाती हैं।
इस प्रस्तावित सौदे में तकनीक हस्तांतरण और देश में निर्माण पर विशेष जोर दिए जाने की संभावना है। इससे न केवल भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति को बल मिलेगा, बल्कि घरेलू रक्षा कंपनियों और MSME सेक्टर को भी बड़ा फायदा होगा।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि 114 राफेल विमानों की तैनाती से भारत की वायु रक्षा क्षमता में बड़ा सुधार होगा और क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन में भारत की स्थिति और मजबूत होगी। अब सभी की निगाहें इस डील की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं।
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