नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (EU-India Free Trade Agreement – FTA) वर्ष 2026 में ही लागू किए जाने की संभावना है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिया है कि इस समझौते से भारत के श्रम-प्रधान (Labour Intensive) क्षेत्रों को सबसे अधिक लाभ मिलने वाला है। यह समझौता दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर खोलेगा।
पीयूष गोयल के अनुसार, भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से चल रही वार्ताएं अब निर्णायक चरण में पहुंच चुकी हैं। सरकार का फोकस ऐसा संतुलित और न्यायसंगत FTA तैयार करने पर है, जिससे भारतीय उद्योगों, खासकर छोटे और मध्यम उद्यमों (MSME) को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर पहुंच मिल सके। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत की “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” पहल को भी मजबूती देगा।
श्रम-प्रधान सेक्टर होंगे सबसे बड़े लाभार्थी
इस FTA के लागू होने से टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट्स, चमड़ा उद्योग, जूते-चप्पल, हस्तशिल्प, कृषि-आधारित उत्पाद और फूड प्रोसेसिंग जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है, ऐसे में निर्यात बढ़ने से नए रोजगार अवसर भी पैदा होंगे।
यूरोपीय बाजार में भारतीय उत्पादों को टैरिफ में छूट मिलने से कीमतों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इससे भारतीय निर्यातकों को फायदा होगा और भारत का निर्यात स्तर नए रिकॉर्ड बना सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
निवेश और तकनीक में भी बढ़ोतरी
EU-India FTA केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे विदेशी निवेश (FDI) और आधुनिक तकनीक के हस्तांतरण को भी बढ़ावा मिलेगा। यूरोपीय कंपनियां भारत में मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल, फार्मा और डिजिटल सेक्टर में निवेश कर सकती हैं। इससे भारत की औद्योगिक क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सुधार होगा।
2026 का लक्ष्य क्यों अहम है
सरकार का लक्ष्य है कि 2026 तक इस समझौते को अंतिम रूप देकर लागू किया जाए, ताकि भारत तेजी से बढ़ती वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी मजबूत स्थिति बना सके। पीयूष गोयल ने भरोसा जताया कि बातचीत के दौरान भारत के श्रमिकों, किसानों और घरेलू उद्योगों के हितों की पूरी तरह रक्षा की जाएगी।
निष्कर्ष
EU-India FTA भारत के लिए एक रणनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके लागू होने से न केवल निर्यात और निवेश बढ़ेगा, बल्कि श्रम-प्रधान क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन भी होगा। 2026 में इसके लागू होने की संभावना भारत-यूरोप आर्थिक संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ सकती है।
ये भी पढ़ें:- उड़ान भरने के करीब 35 मिनट बाद हादसे का शिकार हुआ अजित पवार का विमान, दिल्ली की चार्टर कंपनी का था प्लेन








