महाराष्ट्र में लंबे समय से बारिश न होने के कारण 18–19 जिलों में “सूखे जैसी स्थिति” घोषित की गई है और राज्य सरकार ने किसानों, पशुओं और पेयजल आपूर्ति के लिए तत्काल राहत व तैयारी के कई निर्णय लिए हैं।
वर्तमान स्थिति (सितंबर 2026)
महाराष्ट्र के 18 जिलों और 83 तालुकाओं में 20 दिनों से अधिक समय से बारिश नहीं हुई, जिससे खड़ी खरीफ फसलें सूखने लगीं और चारा-पानी-बिजली का दबाव बढ़ा है।
राज्य मंत्रिमंडल ने 15 सितंबर को इस स्थिति पर करीब 45 मिनट तक चर्चा की और जिला-वार स्थिति का आकलन किया।
सरकार के प्रमुख निर्णय
1) फसल नुकसान आकलन और केंद्रीय राहत
राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के प्रोटोकॉल के तहत फसल क्षति का पंचनामा 5 अक्टूबर से शुरू किया जाएगा; यही आकलन केंद्र से वित्तीय सहायता पाने के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार 5 अक्टूबर तक नहीं रुकेगी; इस बीच जिलाधिकारियों को पूर्व-तैयारी और राहत प्रस्ताव तैयार रखने को कहा गया है।
2) किसानों को तत्काल सहायता की तैयारी
सरकार “सूखे जैसी स्थिति” को गंभीर मानते हुए किसानों को हरसंभव मदद देने, चारा-पानी-सिंचाई सहायता और ऋण राहत के उपाय तेज करने की बात कर रही है।
राज्य का कृषि ऋण माफी कार्यक्रम सक्रिय है; तीन लाभार्थी सूचियां जारी हो चुकी हैं और अतिरिक्त सूचियां तैयार की जा रही हैं।
विपक्षी दलों और शरद पवार ने प्रति हेक्टेयर कम से कम ₹50,000 की सहायता और व्यापक कर्जमाफी की मांग की है; सरकार ने सुझावों पर विचार का संकेत दिया है, पर अंतिम पैकेज अभी घोषित नहीं हुआ।
3) पेयजल संकट से निपटने की तैयारी (अक्टूबर 2026–जून 2027)
सरकार ने अधिकारियों को अक्टूबर 2026 से जून 2027 तक संभावित पेयजल कमी के लिए एक्शन प्लान तैयार करने को कहा है।
ग्रामीण विकास/जल आपूर्ति विभाग के निर्देश: जल संरक्षण उपाय तुरंत शुरू करें, चल रहे जल-जीवन मिशन के प्रोजेक्ट युद्धस्तर पर पूरे करें, और जल स्रोतों के 500 मीटर तक गैर-पेयजल कुएं खोदने की अनुमति न दें।
टैंकर से पानी आपूर्ति को अंतिम विकल्प माना गया है; जहां टैंकर जरूरी हों, वहां टैंकर मालिकों को GPS लगाना अनिवार्य किया गया है।
4) प्रशासनिक तैयारी और समन्वय
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों और मैदान स्तर के अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने, चारा आपूर्ति की उपलब्धता आंकने और बची खरीफ फसलों के लिए सुरक्षात्मक सिंचाई मार्गदर्शन देने को कहा है।
अमरावती विभाग सहित कई जिलों में 30 सितंबर तक जानकारी संकलित कर “शेतकऱ्यांच्या हिताचा अंतिम निर्णय” (किसानों के हित में अंतिम निर्णय) लेने की समयसीमा सामने आई है।
विपक्ष/मांगें (संदर्भ के लिए)
कांग्रेस ने तुरंत सूखा घोषित करने, किसानों के खाते में सीधे ₹50,000/हेक्टेयर जमा करने और समग्र कर्जमाफी की मांग की है।
शरद पवार ने भी गंभीर प्रभावित तालुकाओं में सूखा घोषणा और ₹50,000/हेक्टेयर सहायता की अपील की है।
न्यूज रिपोर्ट के लिए तैयार स्क्रिप्ट (संक्षिप्त, एंकर/शॉर्ट वीडियो हेतु)
हैडलाइन: “महाराष्ट्र में सूखे जैसी स्थिति: 18 जिले प्रभावित, सरकार ने राहत और जल-संकट तैयारी के निर्णय लिए”
लीड: “लंबे शुष्क सत्र के बाद महाराष्ट्र के 18 जिलों और 83 तालुकाओं में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हुई है। राज्य सरकार ने NDRF मानकों के तहत 5 अक्टूबर से फसल पंचनामा शुरू करने, किसानों को हरसंभव मदद देने और अक्टूबर 2026 से जून 2027 तक पेयजल संकट से निपटने के एक्शन प्लान की तैयारी के निर्देश दिए हैं।”
बॉडी पॉइंट्स:
“मंत्रिमंडल ने 15 सितंबर को 45 मिनट तक चर्चा कर जिला-वार स्थिति का आकलन किया।”
“कृषि ऋण माफी की तीन सूचियां जारी; अतिरिक्त सूचियां तैयार।”
“जल संरक्षण, जल-जीवन मिशन के प्रोजेक्ट तेज, और टैंकर पर GPS अनिवार्य।”
“विपक्ष ने ₹50,000/हेक्टेयर सहायता और व्यापक कर्जमाफी की मांग की; सरकार सुझावों पर विचार कर रही है।”








