अभिजीत दीपके जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे CJP संस्थापक अभिजीत दीपके का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि अगर वे चाहते तो “नेपाल और बांग्लादेश ” जैसी स्थिति पैदा कर सकते थे, लेकिन संविधान और लोकतंत्र में विश्वास के कारण उन्होंने ऐसा नहीं किया।
क्या कहा अभिजीत दीपके ने
दीपके के अनुसार, 20 जुलाई के प्रदर्शन में भीड़ काफी बड़ी थी और यदि आंदोलनकारी चाहते तो हालात को उग्र बना सकते थे। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि आंदोलन को लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया।
उनकी मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थीं । CJP का आरोप है कि NEET परीक्षा में अनियमितताओं और कथित पेपर लीक के लिए राजनीतिक जवाबदेही तय होनी चाहिए थीं।
लेकिन सरकार से बातचीत का रुख :
दीपके ने कहा कि अब प्रदर्शनकारी सरकार के पास नहीं जाएंगे; बातचीत जंतर-मंतर या किसी तटस्थ स्थान पर ही होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन मंत्री के इस्तीफे तक जारी रहेगा।
प्रदर्शन के दौरान हिंसा के आरोपों के बीच उन्होंने आंदोलन को शांतिपूर्ण और अहिंसक बनाए रखने की बात कही।
यह बयान राजनीतिक रूप से तीखा है, लेकिन नेपाल और बांग्लादेश की घटनाओं से भारत में वैसी स्थिति बनने का दावा फिलहाल उनके राजनीतिक वक्तव्य के रूप में ही देखा जाना चाहिए; उपलब्ध रिपोर्टों में इसे किसी आधिकारिक सुरक्षा आकलन के तौर पर प्रस्तुत नहीं किया गया है। दीपके ने ऐसा बयान दिया था, लेकिन उसका संदर्भ महत्वपूर्ण है। 20 जुलाई के जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद उन्होंने कहा कि भीड़ चाहती तो नेपाल और बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा कर सकती थी, पर उन्होंने संविधान और लोकतंत्र में विश्वास के कारण ऐसा नहीं किया।
बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि CJP का आंदोलन उन देशों के आंदोलनों से अलग है और भारतीय प्रदर्शनकारियों को नेपाल या बांग्लादेश नहीं, बल्कि महात्मा गांधी के शांतिपूर्ण आंदोलन से प्रेरणा लेनी चाहिए।
इसलिए यह कहना अधिक सही होगा कि उन्होंने “ऐसी स्थिति पैदा कर सकते थे, लेकिन नहीं की” कहा था; उपलब्ध रिपोर्टों में यह नहीं दिखता कि उन्होंने भारत में नेपाल-बांग्लादेश जैसा हिंसक बदलाव करने का सीधा आह्वान किया हो।








