अमरावती : कौंडण्यपुर को प्रमुख पर्यटन केंद्र बनाने के लिए विकास को धार्मिक, सांस्कृतिक, परिवहन और स्थानीय अर्थव्यवस्था—इन चारों स्तरों पर चरणबद्ध ढंग से लागू करना होगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कौंडण्यपुर के लिए लगभग 224 करोड़ रुपये का विकास आराखड़ा उच्चाधिकार समिति के समक्ष मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया गया है। 

कौंडण्यपुर को प्रमुख पर्यटन केंद्र बनाने के लिए विकास को धार्मिक, सांस्कृतिक, परिवहन और स्थानीय अर्थव्यवस्था—इन चारों स्तरों पर चरणबद्ध ढंग से लागू करना होगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कौंडण्यपुर के लिए लगभग 224 करोड़ रुपये का विकास आराखड़ा उच्चाधिकार समिति के समक्ष मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया गया है।
विकास के प्रमुख चरण
मास्टर प्लान और भूमि नियोजन
मंदिर, रुक्मिणी विदर्भ पीठ, नदी तट, पार्किंग, यात्री निवास, बाजार और सांस्कृतिक क्षेत्र के लिए अलग-अलग जोन तय किए जाएं। भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय अनुमति और विरासत संरक्षण की प्रक्रिया पहले पूरी होनी चाहिए।
सड़क और परिवहन संपर्क
कौंडण्यपुर को प्रमुख शहरों, रेलवे स्टेशन और बस मार्गों से जोड़ा जाए। इसे शक्तिपीठ महामार्ग से जोड़ने की घोषणा की जा चुकी है, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही आसान होने की उम्मीद है।
तीर्थयात्री सुविधाओं का निर्माण
पार्किंग, स्वच्छ शौचालय, पेयजल, विश्रामगृह, यात्री निवास, भोजनालय, प्राथमिक चिकित्सा और दिव्यांग-अनुकूल सुविधाएं विकसित की जाएं।
मंदिर और नदी तट का सौंदर्यीकरण
विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर परिसर, वर्धा नदी के घाट और आसपास के धार्मिक स्थलों का संरक्षण करते हुए प्रकाश व्यवस्था, बैठने की जगह, सुरक्षा और स्वच्छता की व्यवस्था की जाए।
सांस्कृतिक पर्यटन का विकास
रुक्मिणी जन्मभूमि, रुक्मिणीहरण कथा और प्राचीन विदर्भ के इतिहास पर संग्रहालय, डिजिटल गैलरी, ध्वनि-प्रकाश कार्यक्रम और सांस्कृतिक मंच बनाए जा सकते हैं। इससे स्थान केवल दर्शन-केंद्र न रहकर पूरे दिन का पर्यटन अनुभव बन सकता है।
स्थानीय रोजगार और बाजार
स्थानीय लोगों को गाइड, होमस्टे, भोजन, हस्तशिल्प, धार्मिक सामग्री और परिवहन सेवाओं से जोड़ा जाए। महिला स्वयं सहायता समूहों और युवाओं के लिए प्रशिक्षण तथा ऋण-सुविधा उपलब्ध कराना जरूरी होगा।
ब्रांडिंग और प्रचार
कौंडण्यपुर को विदर्भ के धार्मिक पर्यटन सर्किट में शामिल किया जाए, जिसमें अमरावती, शेगांव, गुरुकुंज मोझरी और अन्य ऐतिहासिक स्थलों को जोड़ा जा सकता है। आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल ऐप, बहुभाषी सूचना-पट्ट और ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।
चरणबद्ध क्रियान्वयन और निगरानी
पहले चरण में सड़क, पानी, स्वच्छता और पार्किंग; दूसरे चरण में मंदिर, नदी तट और आवास; तीसरे चरण में संग्रहालय, सांस्कृतिक केंद्र और पर्यटन प्रचार का काम किया जा सकता है। प्रत्येक परियोजना के लिए समयसीमा, बजट, जिम्मेदार विभाग और सार्वजनिक प्रगति रिपोर्ट तय होनी चाहिए।
सफलता के लिए सावधानियां
अनियोजित व्यावसायीकरण से धार्मिक और ऐतिहासिक स्वरूप प्रभावित न हो।
नदी तट और पुरातात्त्विक स्थलों पर निर्माण पर्यावरणीय नियमों के अनुरूप हो।
स्थानीय ग्रामसभा और नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
विकास कार्यों के बाद स्वच्छता, यातायात और भीड़-प्रबंधन की स्थायी व्यवस्था रहे।
इस प्रकार, केवल भवन निर्माण के बजाय कनेक्टिविटी + सुविधाएं + विरासत संरक्षण + स्थानीय रोजगार + प्रभावी प्रचार को एकीकृत करने से कौंडण्यपुर को प्रमुख पर्यटन केंद्र बनाया जा सकता है।

Star CG News 24
Author: Star CG News 24

Rajendra Dhote

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