गुवाहाटी: भारत और जापान के बीच होने वाली महत्वपूर्ण वार्षिक शिखर वार्ता को लेकर असम में कई दिनों से उत्साह का माहौल था। गुवाहाटी को इस बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन के लिए सजाया जा रहा था और प्रशासन युद्धस्तर पर तैयारियों में जुटा हुआ था। लेकिन अब जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची के गुवाहाटी दौरे के रद्द होने से इन तैयारियों को बड़ा झटका लगा है। अब उनकी भारत यात्रा केवल नई दिल्ली तक सीमित रहेगी और शिखर वार्ता भी वहीं आयोजित की जाएगी।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें विदेश मंत्रालय की ओर से इस बदलाव की सूचना दी गई है। उन्होंने कहा कि जापान की प्रधानमंत्री इस बार असम नहीं आ पाएंगी। हालांकि, इस फैसले के पीछे के कारणों की आधिकारिक जानकारी राज्य सरकार को नहीं दी गई है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यह जापान सरकार का आंतरिक निर्णय है और राज्य सरकार इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकती।
बताया जा रहा है कि जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची का कार्यक्रम काफी व्यस्त है। जापानी संसद का सत्र चल रहा है और घरेलू स्तर पर कई महत्वपूर्ण बैठकों में उनकी मौजूदगी जरूरी है। ऐसे में उनके पास भारत यात्रा के लिए सीमित समय उपलब्ध है। इसी कारण यात्रा कार्यक्रम को छोटा करते हुए केवल नई दिल्ली में आधिकारिक बैठकों का आयोजन करने का निर्णय लिया गया है।
गौरतलब है कि यह साने ताकाइची की प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली भारत यात्रा होगी। दोनों देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी सहयोग को लेकर यह यात्रा काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पहले यह योजना बनाई गई थी कि भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन का आयोजन गुवाहाटी में होगा, जिससे पूर्वोत्तर भारत में निवेश और विकास को नई गति मिल सके।
इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए गुवाहाटी में कई विकास कार्य तेजी से किए जा रहे थे। शहर की प्रमुख सड़कों का नवीनीकरण, सार्वजनिक स्थलों की सफाई, सौंदर्यीकरण और आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया गया था। हालांकि अब विशेष तैयारियों की आवश्यकता नहीं रहेगी, लेकिन राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि सामान्य विकास कार्य जारी रहेंगे और शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की प्रक्रिया नहीं रुकेगी।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने यह भी कहा कि जापान की ओर से भविष्य में एक अलग कार्यक्रम आयोजित करने का आश्वासन दिया गया है। इस कार्यक्रम के तहत जापानी उद्योग जगत के प्रतिनिधि और निवेशक असम का दौरा कर सकते हैं। इससे राज्य में निवेश बढ़ने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना जताई जा रही है।
यह उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी जापान के एक प्रधानमंत्री का प्रस्तावित असम दौरा रद्द हो चुका है। उस समय परिस्थितियां अलग थीं, लेकिन इस बार कार्यक्रम में बदलाव मुख्य रूप से समय की कमी और प्रशासनिक कारणों से किया गया है।








