देशभर में मेडिकल शिक्षा का सपना देखने वाले लाखों छात्रों के लिए रविवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण रहा। NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो गई। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के अनुसार, इस परीक्षा में 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने भाग लिया और देश के हजारों परीक्षा केंद्रों पर कड़ी निगरानी के बीच परीक्षा आयोजित की गई।
परीक्षा के लिए देशभर में 5,440 से अधिक केंद्र बनाए गए थे। इसके अलावा विदेशों में भी कई परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए, जहां भारतीय छात्रों ने परीक्षा में हिस्सा लिया। NTA ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि प्रत्येक अभ्यर्थी को निष्पक्ष और सुरक्षित वातावरण में परीक्षा देने का अवसर मिले।
इस बार परीक्षा आयोजन में तकनीक का विशेष उपयोग किया गया। अभ्यर्थियों की पहचान के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन और फेस ऑथेंटिकेशन की व्यवस्था की गई। परीक्षा केंद्रों के भीतर और बाहर सीसीटीवी कैमरों के जरिए लगातार निगरानी रखी गई। साथ ही, किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक गड़बड़ी या अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकने के लिए जैमर लगाए गए।
परीक्षा संचालन में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और शिक्षा से जुड़े विभिन्न संस्थानों ने मिलकर काम किया। लाखों कर्मचारियों और अधिकारियों की मदद से परीक्षा प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित किया गया। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों की उम्मीदों से जुड़ा राष्ट्रीय दायित्व था।
विशेष बात यह रही कि इस बार दिव्यांग छात्रों और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अतिरिक्त सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। ऐसे छात्रों को परीक्षा केंद्रों पर आवश्यक सहायता, विशेष बैठने की व्यवस्था और अन्य जरूरी सुविधाएं प्रदान की गईं, ताकि वे बिना किसी कठिनाई के परीक्षा दे सकें।
कई अभ्यर्थियों ने परीक्षा केंद्रों पर व्यवस्थाओं को संतोषजनक बताया। छात्रों का कहना था कि सुरक्षा और अनुशासन के बीच उन्हें शांत वातावरण में परीक्षा देने का अवसर मिला। वहीं अभिभावकों ने भी परीक्षा के सफल आयोजन पर संतोष व्यक्त किया।
अब परीक्षा के बाद छात्रों की निगाहें परिणाम और काउंसलिंग प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की दौड़ में शामिल लाखों अभ्यर्थी अपने प्रदर्शन का इंतजार कर रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शी और व्यवस्थित परीक्षा प्रणाली छात्रों के विश्वास को मजबूत करती है और भविष्य की चयन प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाती है।








