तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय का हालिया दिल्ली दौरा केवल एक औपचारिक राजनीतिक यात्रा नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे राष्ट्रीय राजनीति में उनकी बढ़ती सक्रियता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों और विपक्षी नेताओं से प्रस्तावित मुलाकातों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विजय अब राज्य की सीमाओं से बाहर भी अपनी राजनीतिक भूमिका मजबूत करना चाहते हैं।
मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय पहली बार राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी टीवीके ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया था। इसके बाद कांग्रेस, वाम दलों और अन्य सहयोगी पार्टियों के समर्थन से सरकार का गठन हुआ। तमिलनाडु में कई दशकों बाद गठबंधन सरकार बनने से राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखा गया।
दिल्ली दौरे के दौरान विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने कावेरी नदी विवाद से जुड़ी मेकेदातु परियोजना को लेकर तमिलनाडु की चिंाएं सामने रखीं। विजय ने कहा कि राज्य के किसानों की आजीविका और जल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस मामले में संवेदनशील रवैया अपनाना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने तमिलनाडु के मछुआरों की गिरफ्तारी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि कई भारतीय मछुआरे अब भी श्रीलंका की हिरासत में हैं और बड़ी संख्या में नौकाएं जब्त की जा चुकी हैं। विजय ने केंद्र सरकार से इस विषय पर त्वरित और प्रभावी हस्तक्षेप की मांग की।
इसके अलावा उन्होंने तमिल सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर भी जोर दिया। हाल में तमिल थाई वाझ्थु गीत को लेकर हुए विवाद के संदर्भ में विजय ने कहा कि तमिलनाडु हमेशा राष्ट्रीय एकता और संविधान का सम्मान करता है, लेकिन राज्य की सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बैठक में मुख्यमंत्री विजय ने राज्य के बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास से जुड़े कई प्रस्ताव सौंपे। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे परियोजनाओं, औद्योगिक कॉरिडोर और बंदरगाहों के लिए अतिरिक्त सहायता की मांग की। साथ ही कोयंबटूर, मदुरै और इरोड जैसे शहरों में मेट्रो रेल परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत बताई।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि विजय फिलहाल संतुलित राजनीति की रणनीति अपनाते दिखाई दे रहे हैं। एक ओर वह केंद्र सरकार के साथ संवाद बनाए हुए हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस नेतृत्व के साथ प्रस्तावित मुलाकात को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ होने वाली बैठक फिलहाल टल गई है, लेकिन माना जा रहा है कि यह अगले सप्ताह हो सकती है।
विश्लेषकों के अनुसार, यह मुलाकात भविष्य की विपक्षी राजनीति और दक्षिण भारत में बदलते राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से अहम साबित हो सकती है। विजय की लोकप्रियता खासकर युवाओं के बीच तेजी से बढ़ रही है और उन्हें एक नए राजनीतिक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
अभिनेता से नेता बने विजय अब प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी पहचान मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। दिल्ली दौरे ने यह संकेत जरूर दिया है कि आने वाले समय में वह केवल तमिलनाडु तक सीमित नेता नहीं रहना चाहते, बल्कि व्यापक राजनीतिक भूमिका निभाने की तैयारी में हैं।








