जम्मू-कश्मीर में सामने आए एक कथित जासूसी मामले ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। एक युवा को पाकिस्तान से जुड़े कथित हनीट्रैप नेटवर्क के संपर्क में आने और सेना से संबंधित संवेदनशील तस्वीरें साझा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को फंसाकर जानकारी हासिल करने की कोशिशें लगातार बढ़ रही हैं।
अधिकारियों के अनुसार, आरोपी युवक जम्मू क्षेत्र के एक गांव का रहने वाला है और कुछ समय पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक महिला के संपर्क में आया था। महिला ने खुद को सुरक्षा बल की कर्मी बताया और धीरे-धीरे युवक के साथ दोस्ती बढ़ाई। शुरुआत में बातचीत सामान्य रही, लेकिन बाद में यह लगातार चैटिंग और वीडियो कॉल तक पहुंच गई।
जांच में सामने आया है that महिला ने भरोसा जीतने के बाद युवक से निजी जानकारियां मांगनी शुरू कीं। बाद में उसने मोबाइल ओटीपी और अन्य डिजिटल जानकारी हासिल कर ली। अधिकारियों का कहना है कि इसी के बाद युवक को सेना के बंकरों, पुलों, सड़क मार्गों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों की तस्वीरें भेजने के लिए कहा गया।
सूत्रों के मुताबिक, आरोपी को शुरुआती दौर में कुछ पैसों का लालच भी दिया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह पूरा नेटवर्क बेहद योजनाबद्ध तरीके से काम करता है। पहले सोशल मीडिया के जरिए दोस्ती की जाती है, फिर भावनात्मक संबंध बनाए जाते हैं और अंत में संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती है।
सैन्य खुफिया एजेंसियों को युवक की गतिविधियों पर संदेह होने के बाद निगरानी शुरू की गई। कई दिनों तक उसकी ऑनलाइन गतिविधियों और संपर्कों की जांच की गई। इसके बाद जम्मू पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए उसे हिरासत में ले लिया।
पुलिस ने आरोपी का मोबाइल फोन, बैंक लेनदेन रिकॉर्ड और सोशल मीडिया चैट जब्त किए हैं। जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आरोपी ने कितनी संवेदनशील जानकारी साझा की और क्या इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग भी सक्रिय हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल युग में जासूसी के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। पहले जहां सीमावर्ती क्षेत्रों में सीधे संपर्क बनाकर जानकारी जुटाने की कोशिश होती थी, वहीं अब सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बढ़ गया है। युवाओं को भावनात्मक रूप से प्रभावित कर या नौकरी और पैसे का लालच देकर उन्हें फंसाया जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी अनजान व्यक्ति से ऑनलाइन दोस्ती करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। किसी को भी ओटीपी, बैंक जानकारी, निजी तस्वीरें या संवेदनशील जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।
पुलिस का कहना है कि अगर कोई संदिग्ध प्रोफाइल बार-बार संपर्क करने की कोशिश करे या सेना और सुरक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़ी जानकारी मांगे, तो तुरंत इसकी सूचना पुलिस या साइबर सेल को देनी चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, साइबर सुरक्षा और डिजिटल जागरूकता आज राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल न केवल व्यक्तिगत नुकसान पहुंचा सकता है, बल्कि देश की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है।








