देश में तेजी से फैलते मादक पदार्थों के अवैध कारोबार को लेकर केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने चिंता बढ़ा दी है। हाल के वर्षों में विभिन्न राज्यों से बड़ी मात्रा में ड्रग्स की बरामदगी, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े खुलासे और युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति ने प्रशासन को सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर किया है। अब सरकार ड्रग तस्करी और उससे जुड़े नेटवर्क पर व्यापक स्तर पर कार्रवाई की रणनीति तैयार कर रही है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की भौगोलिक स्थिति उसे अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करों के लिए संवेदनशील बनाती है। पश्चिमी सीमा से हेरोइन की तस्करी और पूर्वोत्तर मार्गों से सिंथेटिक ड्रग्स की खेप आने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। इसके अलावा समुद्री रास्तों का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चुनौती और जटिल हो गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पहले ड्रग्स नेटवर्क मुख्य रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों तक सीमित था, लेकिन अब यह महानगरों, छोटे शहरों और ऑनलाइन माध्यमों तक फैल चुका है। सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड ऐप और डिजिटल पेमेंट सिस्टम के जरिए तस्कर युवाओं तक आसानी से पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। यही कारण है कि जांच एजेंसियां अब साइबर ट्रैकिंग और डिजिटल निगरानी पर विशेष ध्यान दे रही हैं।
हाल ही में कई राज्यों में की गई कार्रवाई के दौरान करोड़ों रुपये के मादक पदार्थ जब्त किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में विदेशी नेटवर्क, हवाला चैनल और संगठित अपराध से जुड़े लोगों की भूमिका हो सकती है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ड्रग्स से होने वाली कमाई का इस्तेमाल अन्य अवैध गतिविधियों में भी किया जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ड्रग्स का खतरा केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक स्थिरता को भी प्रभावित करता है। युवाओं में नशे की लत बढ़ने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, अपराध और सामाजिक तनाव जैसी चुनौतियां बढ़ सकती हैं। कई राज्यों में नशे से जुड़े अपराधों में वृद्धि भी चिंता का विषय बनती जा रही है।
सरकार अब एजेंसियों को आधुनिक तकनीक और बेहतर संसाधनों से लैस करने की दिशा में काम कर रही है। ड्रोन निगरानी, डेटा एनालिटिक्स, समुद्री सुरक्षा तकनीक और वित्तीय ट्रैकिंग सिस्टम को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि तकनीक आधारित निगरानी से बड़े नेटवर्क तक पहुंचना आसान होगा।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, सीमा सुरक्षा बल, तटरक्षक बल और राज्य पुलिस के बीच समन्वय बढ़ाने के प्रयास भी जारी हैं। कई संवेदनशील क्षेत्रों में संयुक्त अभियान चलाए जा रहे हैं। समुद्री बंदरगाहों, कंटेनर टर्मिनलों और अंतरराष्ट्रीय कूरियर नेटवर्क पर विशेष नजर रखी जा रही है।
सामाजिक विशेषज्ञों का कहना है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं जीती जा सकती। इसके लिए स्कूलों, कॉलेजों और समुदाय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाना भी जरूरी है। युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में शिक्षित करने और पुनर्वास सुविधाएं बढ़ाने की आवश्यकता बताई जा रही है।
आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, ड्रग्स कारोबार से जुड़ा काला धन वित्तीय प्रणाली को भी प्रभावित करता है। हवाला नेटवर्क और नकली कंपनियों के जरिए यह पैसा अवैध गतिविधियों तक पहुंच सकता है, जिससे आर्थिक पारदर्शिता पर असर पड़ता है।








