‘एक स्वर’ की अपील पर सियासत तेज: महिला आरक्षण संशोधन को लेकर सरकार-विपक्ष आमने-सामने

नई दिल्ली में संसद के विस्तारित बजट सत्र से पहले महिला आरक्षण कानून को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सभी राजनीतिक दलों के प्रमुखों को पत्र लिखकर महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 में प्रस्तावित संशोधनों को “एक स्वर” में पारित करने की अपील की है। उन्होंने इसे देश की महिलाओं के प्रति जिम्मेदारी निभाने का अहम मौका बताया है।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना केवल एक राजनीतिक एजेंडा नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की दिशा में जरूरी कदम है। उन्होंने सभी दलों से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाएं और संसद में सकारात्मक सहयोग करें। उनके अनुसार, यह पहल आने वाले समय में भारत की लोकतांत्रिक संरचना को और मजबूत करेगी।

सरकार की योजना है कि बजट सत्र के विस्तारित चरण में इस कानून से जुड़े आवश्यक संशोधनों को पारित किया जाए, ताकि महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। माना जा रहा है कि इसमें परिसीमन और सीटों के पुनर्विन्यास से जुड़े प्रावधानों को स्पष्ट किया जा सकता है, जिससे भविष्य में इसके क्रियान्वयन में कोई बाधा न आए।

हालांकि, इस मुद्दे पर विपक्ष की ओर से कई सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने प्रधानमंत्री के पत्र का जवाब देते हुए कहा कि इतना महत्वपूर्ण विधेयक लाने से पहले व्यापक स्तर पर चर्चा होनी चाहिए थी। उन्होंने समय और प्रक्रिया दोनों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि इस कानून का असर देश के संघीय ढांचे पर पड़ेगा, इसलिए राज्यों और अन्य हितधारकों से परामर्श जरूरी है।

खड़गे ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कई बार महत्वपूर्ण विधेयकों को जल्दबाजी में पारित कराने की कोशिश करती है, जिससे लोकतांत्रिक बहस प्रभावित होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस महिला सशक्तिकरण के पक्ष में है, लेकिन किसी भी कानून को पारदर्शी और समावेशी प्रक्रिया के तहत लाया जाना चाहिए।

इस पूरे घटनाक्रम ने सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर दी है। जहां एक ओर सरकार इसे ऐतिहासिक अवसर के रूप में पेश कर रही है, वहीं विपक्ष इसे प्रक्रिया की अनदेखी बताते हुए सवाल उठा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे पर सहमति बनाना आसान नहीं होगा, लेकिन अगर सभी दल एक मंच पर आते हैं, तो यह एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।

महिला आरक्षण का मुद्दा कई वर्षों से लंबित रहा है और इसे लेकर देशभर में बहस होती रही है। यदि इस बार यह कानून प्रभावी रूप से लागू हो जाता है, तो संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

Star CG News 24
Author: Star CG News 24

Rajendra Dhote

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