Delhi : ईरान ने इस्लामाबाद वार्ता में अमेरिका व इजरायल के साथ समझौता करने के लिए चार मुख्य “नो‑कॉम्प्रोमाइज” शर्तें रखी हैं, जिन पर तेहरान बहुत अड़ी हुई है। 

ईरान ने इस्लामाबाद वार्ता में अमेरिका व इजरायल के साथ समझौता करने के लिए चार मुख्य “नो‑कॉम्प्रोमाइज” शर्तें रखी हैं, जिन पर तेहरान बहुत अड़ी हुई है।
1. होर्मुज़ स्ट्रेट पर नियंत्रण”ईरानईरा वैसा दावा चाहता है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर उसकी “नियंत्रण” या कम‑से‑कम “अधिकार” मान्यता मिले, ताकि वह जहाजों से टोल/फीस लेने और यातायात पर दबाव डालने की क्षमता हासिल कर सके।
इससे खाड़ी के तेल निर्यात और नौसेना गतिविधियों पर ईरान का भू‑नौसैनिक दबदबा बढ़ जाएगा, जो अमेरिका और यूरोप के लिए बड़ी चिंता का विषय है।
2. लेबनान–इजरायल फ्रंट पर सीजफायर
ईरान हमास–हिज़बुल्लाह समेत अपने “रीजनल एलाइज़” के खिलाफ इजरायली हमले तुरंत रोकने और लेबनान में भी सीजफायर व्यवस्था लाने की मांग कर रहा है।
इसका मतलब यह है कि सीजफायर सिर्फ़ ईरान–अमेरिका और गल्फ़ तक सीमित न रहकर लेबनान और गाजा‑अरब तट तक व्यापक रूप से लागू हो।
3. आर्थिक और नाभिकीय सुरक्षा गारंटी
ईरान चाहता है कि लगभग सभी आर्थिक प्रतिबंध (सैंक्शन) हटाए जाएँ और उसके कुछ अरब डॉलर के冻结 assets (लगभग 6 बिलियन डॉलर के करीब) को वापस दिए जाएँ।
साथ ही वह अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम और बैलिस्टिक‑मिसाइल कार्यक्रम पर “कोई सख्त लिमिटेशन” स्वीकार नहीं करना चाहता; बस यह चाहता है कि भविष्य में अमेरिका या इजरायल इसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई न करें।
4. युद्ध के नुकसान की मुआवज़ा और भविष्य की गारंटी
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने युद्ध में अपने हुए नुकसानों के लिए किसी रूप का मुआवज़ा (reparations/compensation) भी माँगा है, यद्यपि यह अंततः कितना दावा पैच रहता है यह वार्ता के बीच तय होगा।
साथ ही ईरान चाहता है कि समझौते में ऐसी गारंटी हो कि भविष्य में अमेरिका और इजरायल उसके खिलाफ “प्री‑एम्प्टिव” या बड़े‑पैमाने पर मिसाइल/हवाई हमले न करें; यह उसकी सुरक्षा‑नीति की केंद्रीय शर्त बन गई है।

Star CG News 24
Author: Star CG News 24

Rajendra Dhote

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