भारत की प्रमुख विमानन कंपनी Air India एक बार फिर बड़े बदलाव के दौर में प्रवेश करती नजर आ रही है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और प्रबंध निदेशक (MD) कैंपबेल विल्सन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस खबर ने न केवल कंपनी के भीतर बल्कि पूरे विमानन उद्योग में हलचल मचा दी है।
कैंपबेल विल्सन को वर्ष 2022 में एयर इंडिया की कमान सौंपी गई थी। उस समय कंपनी टाटा समूह के अधिग्रहण के बाद पुनर्गठन और विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रही थी। विल्सन को पांच साल के अनुबंध पर नियुक्त किया गया था, जिसका कार्यकाल जुलाई 2027 तक निर्धारित था। ऐसे में उनका समय से पहले इस्तीफा देना एक अप्रत्याशित कदम माना जा रहा है।
विल्सन के पास विमानन क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक का अनुभव रहा है। उन्होंने अपने करियर में फुल-सर्विस और लो-कॉस्ट दोनों प्रकार की एयरलाइंस के साथ काम किया है। एयर इंडिया में उनकी नियुक्ति का उद्देश्य कंपनी को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत बनाना और सेवा गुणवत्ता में सुधार लाना था।
एयर इंडिया में शामिल होने से पहले वह Scoot के सीईओ थे, जो Singapore Airlines की लो-कॉस्ट सहायक कंपनी है। उनके नेतृत्व में Scoot ने एशियाई बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाई और कम लागत वाली सेवाओं में नया मानक स्थापित किया। इससे पहले उन्होंने सिंगापुर एयरलाइंस के साथ कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1996 में New Zealand से मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में की थी। इसके बाद उन्होंने Canada, Hong Kong और Japan जैसे देशों में काम करते हुए वैश्विक अनुभव अर्जित किया। उनकी इसी अंतरराष्ट्रीय समझ और रणनीतिक सोच को देखते हुए उन्हें एयर इंडिया की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
विल्सन के कार्यकाल के दौरान एयर इंडिया ने कई अहम सुधार किए। कंपनी ने अपने बेड़े को आधुनिक बनाने, नई उड़ानों को जोड़ने और यात्रियों के अनुभव को बेहतर करने के लिए कई कदम उठाए। साथ ही, डिजिटल सेवाओं और ग्राहक संतुष्टि पर भी विशेष ध्यान दिया गया। टाटा समूह के विजन के तहत एयरलाइन को एक विश्वस्तरीय ब्रांड बनाने की दिशा में काम जारी रहा।
हालांकि, उनके इस्तीफे के पीछे के कारणों का अब तक आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति में बदलाव या आंतरिक पुनर्गठन का हिस्सा हो सकता है। वहीं, कुछ विश्लेषक इसे वैश्विक विमानन उद्योग में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और आर्थिक दबावों से जोड़कर देख रहे हैं।
अब एयर इंडिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती नए नेतृत्व का चयन करना है। आने वाले सीईओ को कंपनी की विस्तार योजनाओं को आगे बढ़ाने, लागत नियंत्रण और सेवा गुणवत्ता को बनाए रखने की जिम्मेदारी संभालनी होगी।








