ईरान युद्ध (2026) का ऐतिहासिक संदर्भ इस संघर्ष की जड़ें दशकों पुरानी अमेरिका-ईरान दुश्मनी में हैं, जो 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से चली आ रही है। यह युद्ध फरवरी 2026 में शुरू हुआ, जब अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त हमले (Operation Epic Fury) किए, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातोल्लाह अली खामेनेई समेत कई शीर्ष नेता मारे गए।
लंबे समय का बैकग्राउंड:
1953 का अमेरिकी समर्थित कूप: अमेरिका और ब्रिटेन ने ईरान के लोकतांत्रिक प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसद्देक को हटाया, क्योंकि उन्होंने तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण किया था। शाह मोहम्मद पहलवी को फिर सत्ता सौंपी गई, जिसे अमेरिका का समर्थन मिला। यह ईरान में अमेरिका-विरोधी भावनाओं की नींव बना।
1979 की इस्लामिक क्रांति: शाह की तानाशाही और अमेरिकी प्रभाव के खिलाफ क्रांति हुई। अयातोल्लाह खोमैनी के नेतृत्व में इस्लामिक गणराज्य स्थापित हुआ। ईरानी छात्रों ने अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर 52 अमेरिकियों को 444 दिनों तक बंधक बनाया (Iran Hostage Crisis)। इससे दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध टूट गए।
1980-88 का ईरान-इराक युद्ध: अमेरिका ने सद्दाम हुसैन के इराक को समर्थन दिया। 1988 में अमेरिका ने ईरानी जहाज और तेल प्लेटफॉर्म नष्ट किए, और एक ईरानी यात्री विमान को गलती से गिरा दिया (290 मौतें)।
2000-2010: ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम पर टेंशन। 2015 में ओबामा के समय JCPOA (न्यूक्लियर डील) हुई, लेकिन ट्रंप ने 2018 में अमेरिका को बाहर निकाला और प्रतिबंध लगाए। 2020 में अमेरिका ने जनरल कासेम सुलेमानी को मार डाला, जिसके बाद ईरान ने इराक में अमेरिकी बेस पर मिसाइलें दागीं।
हाल के वर्षों में बढ़ती टेंशन:
ईरान के प्रॉक्सी ग्रुप्स (हिजबुल्लाह, हमास, हूती) के जरिए मध्य पूर्व में प्रभाव बढ़ाना।
2023-25: इजराइल-हमास युद्ध के बाद 2025 में 12-दिवसीय इजराइल-ईरान युद्ध। अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर हमले किए।
2025-26: न्यूक्लियर बातचीत चल रही थी, लेकिन फरवरी 2026 में ट्रंप प्रशासन ने हमला कर दिया। मुख्य कारण — ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम रोकना, मिसाइल क्षमता नष्ट करना, क्षेत्रीय प्रभाव कम करना और कुछ हद तक रिजीम चेंज।
ट्रंप इस युद्ध को 1979 से चली आ रही “47 साल की दुश्मनी” का हिसाब बताते हैं। ईरान को “स्टोन एज” में भेजने की धमकी और रिजीम चेंज की बात उन्होंने की, हालांकि लक्ष्य बदलते रहे।
यह युद्ध अब तक मुख्य रूप से एयर स्ट्राइक्स पर आधारित है, लेकिन तेल मार्ग (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज), क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका असर पड़ रहा है। इतिहास दिखाता है कि अमेरिका-ईरान संबंध हमेशा संदेह, प्रतिबंध और प्रॉक्सी संघर्षों से भरे रहे हैं — अब यह डायरेक्ट युद्ध में बदल गया है।








