वॉशिंगटन: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के बयान फिर चर्चा में हैं। हालिया भाषणों और मीडिया इंटरव्यू में उनके रुख में आए बदलाव को लेकर राजनीतिक विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं। कभी वे सैन्य कार्रवाई को “ज़रूरी कदम” बताते हैं, तो कभी कहते हैं कि अमेरिका को लंबे युद्ध में नहीं फंसना चाहिए।
ट्रंप ने एक बयान में कहा कि अमेरिका ने संभावित खतरे को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए। लेकिन कुछ ही समय बाद उन्होंने यह भी कहा कि अगर हालात सुधरते हैं तो कूटनीतिक रास्ता अपनाया जा सकता है। इस तरह के बदलते संदेशों ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या यह रणनीतिक लचीलापन है या राजनीतिक दबाव का असर।
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी माहौल में विदेश नीति पर कड़ा रुख दिखाना राजनीतिक तौर पर फायदेमंद माना जाता है। वहीं दूसरी ओर, लंबे सैन्य संघर्ष से बचने का संदेश भी घरेलू मतदाताओं को आकर्षित कर सकता है। यही कारण है कि ट्रंप के बयान अलग-अलग मंचों पर अलग अंदाज में सामने आ रहे हैं।
कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने मांग की है कि सरकार स्पष्ट करे कि अमेरिका की दीर्घकालिक रणनीति क्या है। उनका कहना है कि विदेश नीति में स्थिरता जरूरी होती है, खासकर तब जब मामला मध्य पूर्व जैसे संवेदनशील क्षेत्र का हो।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि ट्रंप का रुख किस दिशा में स्थिर होता है। फिलहाल उनके बयानों ने बहस जरूर तेज कर दी है।








