तेहरान — अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई ने पश्चिम एशिया को एक नए संघर्ष के दौर में धकेल दिया है, जिसकी प्रतिक्रिया अब खाड़ी देशों में मिसाइल हमलों और सुरक्षा अलर्ट के रूप में सामने आ रही है।
बताया जा रहा है कि ईरानी सेना ने जवाबी कार्रवाई में लगभग 400 मिसाइलें और ड्रोन कई देशों की ओर भेजे, जिनमें कुवैत, बहरीन, सऊदी अरब और दुबई शामिल हैं। इससे खाड़ी के प्रमुख नगरों में धमाकों की आवाज़ें सुनी गईं और सुरक्षा केंद्रों ने चेतावनी जारी की।
दुबई की मशहूर बुर्ज खलीफा के पास भी मिसाइल धमाका दर्ज किया गया, जिसके तुरंत बाद उसे खाली कर दिया गया और आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित किया गया। इसी वजह से एयर सर्विस और यातायात प्रभावित हुए हैं।
यह सैन्य संघर्ष उस समय और भी गंभीर रूप ले रहा है जब अमेरिका-इज़राइल की संयुक्त हमलों में ईरान के कई ठिकानों को निशाना बनाया गया, और देश ने कड़े प्रतिकार की चेतावनी दी है। ईरानी अधिकारियों ने भी कहा है कि वे जवाबी कार्रवाई में संदेह नहीं करेंगे।
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठकें चल रही हैं, जहां कई देशों ने मध्यपूर्व में तनाव को कम करने और कूटनीतिक समाधान खोजने का आग्रह किया है। हालांकि संघर्ष अभी भी जारी है और क्षेत्रीय देशों समेत दुनिया भर के सुरक्षा विशेषज्ञ इसे गंभीर मान रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह संघर्ष केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि आर्थिक, ऊर्जा और वैश्विक बाजारों पर भी इसका असर पड़ेगा। तेल उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के कारण वैश्विक कीमतें अस्थिर होती दिखाई दे रही हैं।
आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास तनाव को कम कर पाएंगे या यह संघर्ष और भी व्यापक रूप ले लेगा।








